by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में पुरानी वस्तुओं और कचरे की बिक्री से करीब 800 करोड़ रुपये की कमाई की है, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-3 अभियान की पूरी लागत (लगभग 615 करोड़ रुपये) से कहीं अधिक है। यह सफलता ‘विशेष सफाई अभियान 4.0’ के अंतर्गत हासिल की गई, जिसमें सरकारी कार्यालयों में जमा बेकार सामान को हटाकर उसे आर्थिक रूप से उपयोगी बनाया जा रहा है।
इस अभियान में मंत्रालयों, सार्वजनिक कंपनियों और सरकारी संस्थानों से पुराने फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, गाड़ियां, मशीनें तथा अन्य कबाड़ को इकट्ठा किया गया। इनकी बिक्री मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन (एमएसटीसी) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) प्लेटफॉर्म के जरिए नीलामी से हुई। सिर्फ अक्टूबर में ही 800 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि प्राप्त हुई, जो पिछले रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ती है।
यह कमाई न सिर्फ सरकारी कोष को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी कर रही है क्योंकि रिसाइक्लिंग से कचरे का बोझ कम हो रहा है और नई सामग्री की जरूरत घट रही है। चंद्रयान-3 मिशन, जो 2023 में शुरू होकर चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर पहली सफल लैंडिंग करने वाला वैश्विक मिशन बना, की कम लागत में बड़ी कामयाबी को इस स्क्रैप बिक्री ने पार कर लिया। इसरो की यह उपलब्धि बजट प्रबंधन का उदाहरण थी, जबकि कचरा बिक्री से मिला पैसा रोजमर्रा के सरकारी कामों में लगेगा।
अधिकारियों के अनुसार, अभियान में अब तक 2 लाख से ज्यादा जगहों की सफाई हो चुकी है, 5 करोड़ वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र खाली किया गया है और करोड़ों पुरानी फाइलें नष्ट की गई हैं। यह प्रयास प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत’ सपने से जुड़ा है और आगे भी चलता रहेगा।
