By: Ravindra Sikarwar
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अंचल क्षेत्र में पहली बार एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन पटेवा मंडल के ग्राम जोगीडीपा स्थित सिद्धनाथ मंदिर परिसर में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और ग्रामीणजन एकत्रित हुए। सम्मेलन का उद्देश्य संघ की शताब्दी वर्ष की उपलब्धियों को रेखांकित करना, राष्ट्रसेवा की भावना को सुदृढ़ करना और समाज में एकता व समरसता का संदेश देना रहा।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश शर्मा, प्रान्त सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख, ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, उसके मूल उद्देश्य और अब तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब देश पराधीनता के दौर से गुजर रहा था और समाज को विभाजित करने के प्रयास हो रहे थे, तब राष्ट्रभक्ति और सामाजिक संगठन की आवश्यकता को महसूस करते हुए 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। डॉ. शर्मा ने कहा कि संघ का उद्देश्य किसी एक वर्ग तक सीमित न होकर पूरे समाज को संगठित कर राष्ट्रनिर्माण में योगदान देना रहा है।
उन्होंने अपने उद्बोधन में यह भी उल्लेख किया कि संघ को अपने प्रारंभिक वर्षों से लेकर अब तक कई प्रकार की चुनौतियों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा, लेकिन संगठन ने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कार्य को आगे बढ़ाया। समाज सेवा, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक जागरण जैसे क्षेत्रों में संघ और उससे जुड़े संगठनों की भूमिका पर भी उन्होंने प्रकाश डाला।
सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित सरला कोसरिया, सामाजिक कार्यकर्ता, ने हिन्दू धर्म और संस्कृति से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिन्दू होना किसी जाति या वर्ग की पहचान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ मानवीय गुणों को अपनाने की जीवनशैली है। उनके अनुसार हिन्दू समाज में विभाजन जन्म के आधार पर नहीं, बल्कि कर्म और कर्तव्य के आधार पर समझा गया है। उन्होंने समाज से आपसी भेदभाव छोड़कर एक-दूसरे के साथ समरसता से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सम्मेलन में कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें विभाग धर्म जागरण प्रमुख विपिन शर्मा, विभाग प्रचारक ठाकुर राम, जिला बौद्धिक शिक्षण प्रमुख विवेक दीक्षित, खण्ड कार्यवाह चन्दन डडसेना, प्रेम शंकर, जिला महाविद्यालय प्रमुख गुलाब ठाकुर सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल थे। सभी वक्ताओं ने अपने विचारों के माध्यम से समाज में जागरूकता, संगठन और राष्ट्रसेवा के महत्व को रेखांकित किया।
सम्मेलन का संचालन खंड सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख **राधेश्याम सोनी** द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला धर्म जागरण प्रमुख **त्रिलोक शर्मा** ने प्रस्तुत किया। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, ग्रामवासियों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
अंचल में पहली बार आयोजित इस हिन्दू सम्मेलन का समापन सामूहिक भोजन प्रसादी और रुद्राक्ष वितरण के साथ हुआ। आयोजन का समग्र उद्देश्य केवल संघ की शताब्दी वर्ष की स्मृति को मनाना नहीं था, बल्कि समाज में एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रसेवा की भावना को और अधिक मजबूत करना रहा। सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि संगठित समाज ही राष्ट्र को सशक्त बना सकता है और यही संघ की सौ वर्षों की साधना का मूल सार है।
