by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने एक बार फिर अपने उस बयान को दोहराया है, जिसमें उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान सामने आए “झटकों” का जिक्र किया था। उनके इस पूर्व बयान ने कुछ विवाद खड़ा कर दिया था। जनरल चौहान ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि किसी भी कथित नुकसान की तुलना में ऑपरेशन का अंतिम परिणाम कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और प्रारंभिक टिप्पणी
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों को निष्क्रिय करने के लिए शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान है। इस ऑपरेशन के दौरान, सीडीएस जनरल चौहान ने पहले कुछ “झटकों” या चुनौतियों का उल्लेख किया था। इन टिप्पणियों को लेकर कुछ हलकों में चिंताएं और सवाल उठे थे, जिससे ऑपरेशन की वास्तविक स्थिति और उसमें भारतीय सेना को हुई किसी भी संभावित क्षति पर अटकलें लगाई जाने लगी थीं।
जनरल चौहान का ताजा बयान: परिणाम सर्वोपरि
मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में, जनरल चौहान ने अपने पहले के बयान को स्पष्ट करते हुए कहा, “किसी भी सैन्य अभियान में, खासकर जब वह दुश्मन के इलाके में हो, कुछ अप्रत्याशित चुनौतियाँ या ‘झटके’ सामने आ सकते हैं। यह युद्ध का एक स्वाभाविक हिस्सा है। महत्वपूर्ण यह है कि इन झटकों को कैसे संभाला जाता है और अंततः ऑपरेशन अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करता है या नहीं।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा ध्यान हमेशा ऑपरेशन के अंतिम लक्ष्य पर होता है – जो कि आतंकी ढांचे को पूरी तरह से नष्ट करना और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बहाल करना है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हमें जो सफलता मिली है, वह किसी भी छोटी-मोटी चुनौती से कहीं अधिक है।”
सुरक्षा विशेषज्ञों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया:
जनरल चौहान की प्रारंभिक टिप्पणी के बाद, कई सुरक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। कुछ ने सेना की पारदर्शिता की सराहना की थी, जबकि कुछ अन्य ने चिंता व्यक्त की थी कि ऐसी टिप्पणियां दुश्मन को गलत संकेत दे सकती हैं या घरेलू मोर्चे पर मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया था। हाल ही में, विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। विपक्षी दलों का तर्क है कि इस ऑपरेशन से संबंधित सभी पहलुओं पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए ताकि जनता को पूरी जानकारी मिल सके और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
आगे की राह:
जनरल चौहान का यह नवीनतम बयान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और उसके व्यापक रणनीतिक महत्व पर जोर देता है। उनका मानना है कि किसी भी अभियान में सामने आने वाली बाधाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका अंतिम परिणाम और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उसका प्रभाव है। इस बीच, विपक्षी दल संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की मांग पर अड़े हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उससे जुड़े घटनाक्रम निकट भविष्य में भी राजनीतिक और सैन्य विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।
