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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को आगामी G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से चले आ रहे तनावपूर्ण राजनयिक संबंधों में संभावित ‘पिघलाव’ (thaw) के संकेत दे रहा है।

आमंत्रण का महत्व:
G7, दुनिया की सात सबसे बड़ी तथा विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। हालांकि भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक महत्व के मुद्दों पर चर्चा के लिए अक्सर भारत जैसे प्रमुख विकासशील देशों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता रहा है। ऐसे में, कनाडा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया यह सीधा आमंत्रण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच खालिस्तानी अलगाववाद और उससे जुड़े मामलों को लेकर पिछले एक साल से अधिक समय से राजनयिक खींचतान जारी है।

संबंधों में जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद:
सितंबर 2023 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के भारत दौरे और खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप में कनाडा में भारतीय एजेंटों की कथित संलिप्तता के आरोपों के बाद से दोनों देशों के संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘बेतुका’ और ‘प्रेरित’ बताया था। कई राजनयिकों को वापस बुलाया गया था, और विभिन्न क्षेत्रों में संबंध ठंडे पड़ गए थे।

G7 सम्मेलन के लिए यह निमंत्रण, द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कनाडा की ओर से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है, जिसे कनाडा अब नजरअंदाज नहीं कर सकता।

G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका:
प्रधानमंत्री मोदी की G7 शिखर सम्मेलन में उपस्थिति भारत को वैश्विक मंच पर अपने दृष्टिकोण को मजबूती से रखने का अवसर देगी। भारत, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज भी है। G7 में भारत की भागीदारी से जलवायु परिवर्तन, वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में और गहराई आएगी।

यह उम्मीद की जा रही है कि शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जस्टिन ट्रूडो के बीच अनौपचारिक मुलाकात भी हो सकती है, जो दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हालांकि, संबंधों में पूरी तरह से सुधार आने में समय लग सकता है, लेकिन यह आमंत्रण निश्चित रूप से एक सकारात्मक शुरुआत है।

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