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By: Ravindra Sikarwar

इंदौर: स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने काले हिरण के शिकार और मांस तस्करी से जुड़े एक संगठित गिरोह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांचवें आरोपी आजाद सिंह सोलंकी को शाजापुर जिले के राघौखेड़ी गांव से गिरफ्तार कर लिया। वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के गंभीर उल्लंघन से जुड़े इस मामले में पहले से ही चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। एफएसटीएफ द्वारा आरोपी से की गई पूछताछ में कई अहम जानकारी सामने आई हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि गिरोह लंबे समय से खेतों में आने वाले वन्यजीवों का अवैध रूप से शिकार कर रहा था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद आरोपी आजाद सिंह को न्यायालय ने जेल भेज दिया है।

गिरफ्तारी के दौरान उजागर हुए चौंकाने वाले तथ्य
पूछताछ के दौरान आजाद सिंह सोलंकी ने माना कि वह खेतों में अक्सर आने वाले काले हिरणों की गतिविधियों पर नजर रखता था और उनके शिकार में सक्रिय भूमिका निभाता था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी स्थानीय भूगोल और जाने-पहचाने इलाकों का फायदा उठाकर हिरणों को आसानी से निशाना बनाता था। टीम के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने यह भी बताया कि हिरण का मांस विभिन्न लोगों को सप्लाई किया जाता था, और कई बार मौके पर ही मांस को अलग-अलग हिस्सों में काटकर तस्करी के लिए तैयार किया जाता था। इस खुलासे के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपी वन्यजीवों की अवैध तस्करी से जुड़े एक बड़े गिरोह का हिस्सा हो सकता है।

गिरोह की गतिविधियों के नेटवर्क की जांच तेज
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स इस मामले को एक बड़े नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। टीम को शक है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर पर संचालित कोई साधारण शिकार गिरोह नहीं, बल्कि वन्यजीवों के मांस और अन्य हिस्सों की तस्करी में शामिल संगठित नेटवर्क है। जांच टीम द्वारा आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि हिरण के शिकार के लिए आरोपियों ने कई बार मोटरसाइकिल, कार और अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, कई खेत मालिकों की निष्क्रिय सहमति या शिकारियों के डर की वजह से यह गतिविधि कई महीनों से जारी थी। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस और स्ट्राइक फोर्स दोनों ही गिरोह के बाकी सदस्यों की पहचान में जुट गए हैं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
भारत में काले हिरण का शिकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दंडनीय अपराध है, जिसमें तीन से सात वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है। अदालत ने रिमांड अवधि पूरी होने के बाद आजाद सिंह को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगे की पूछताछ में कई और नाम सामने आने की संभावना है, जिनके खिलाफ जल्द ही गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा सकते हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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