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BJP: भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में सोमवार का दिन एक महत्वपूर्ण मोड़ बनकर सामने आया, जब नितिन नवीन का पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चयन तय हुआ। लगभग साढ़े चार दशकों की संगठनात्मक यात्रा के बाद पहली बार भाजपा की कमान ठीक 45 वर्ष की उम्र के नेता को सौंपी जा रही है। यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक दौर की तैयारी का स्पष्ट संकेत है।

BJP: वैचारिक नींव से आधुनिक संगठन तक

भाजपा की जड़ें 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं। राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और सशक्त भारत की अवधारणा इसी दौर में विकसित हुई। आपातकाल के बाद राजनीतिक परिस्थितियों ने करवट बदली और 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ। यही वह आधार था, जिस पर आगे चलकर एक राष्ट्रीय राजनीतिक शक्ति खड़ी हुई।

BJP: अटल–आडवाणी युग और सत्ता की दहलीज

भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने पार्टी को वैचारिक दिशा दी।

इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में संगठन ने जनआंदोलनों के माध्यम से विस्तार किया।

राम मंदिर आंदोलन ने पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और 1990 के दशक में भाजपा सत्ता के केंद्र तक पहुंची।

अटल सरकार के दौर में गठबंधन राजनीति और संगठनात्मक मजबूती दोनों साथ चले।

मोदी युग: विस्तार और निर्णायक नेतृत्व

2004 की हार के बाद पार्टी ने खुद को पुनर्गठित किया।

2013 में नरेंद्र मोदी को नेतृत्व सौंपा गया, जिसके बाद 2014 और 2019 में भाजपा ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया।

अमित शाह और फिर जेपी नड्डा के संगठनात्मक नेतृत्व में भाजपा देश की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी।

नितिन नवीन: नई सोच, नया संकेत

अब 45 वर्षीय नितिन नवीन के हाथों में राष्ट्रीय नेतृत्व आना भाजपा के भीतर पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक है।

संगठन से जुड़े रहे नितिन नवीन को युवा ऊर्जा और प्रशासनिक समझ का संतुलन माना जा रहा है।

उनका चयन यह दर्शाता है कि भाजपा भविष्य की राजनीति में अनुभव के साथ-साथ नई सोच को भी बराबर महत्व दे रही है।

45 वर्षों की यात्रा में अब पार्टी एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुकी है।

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