by-Ravindra Sikarwar
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी महागठबंधन ने अपनी एकता का ऐलान करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के युवा नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक चेहरा बनाने का फैसला किया है। यह घोषणा गुरुवार को पटना में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की गई, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार चुनाव पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने इसे औपचारिक रूप दिया। साथ ही, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश साहनी को उप-मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया, जबकि एक अन्य उप-मुख्यमंत्री पद के लिए नाम की घोषणा बाद में होने की बात कही गई। यह कदम गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर चले विवादों के बाद आया है, जो अब पूरी तरह सुलझ चुका लगता है।
घोषणा का पूरा घटनाक्रम:
संवाददाता सम्मेलन होटल मौर्य में आयोजित हुआ, जिसमें महागठबंधन के प्रमुख दलों—आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वामपंथी दलों—के शीर्ष नेता मौजूद थे। अशोक गहलोत ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सभी वरिष्ठ नेताओं के सहमति से हम तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रहे हैं।” उन्होंने मुकेश साहनी की मेहनत की सराहना करते हुए उन्हें उप-मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताया। गहलोत ने जोर देकर कहा कि गठबंधन पूर्ण एकता के साथ चुनाव लड़ेगा और बिहार की जनता परिवर्तन की मांग कर रही है।
तेजस्वी यादव ने संबोधन में कहा, “हम सरकार बनाने या मुख्यमंत्री बनने के लिए नहीं, बल्कि बिहार को बदलने के लिए एकजुट हैं। मैं महागठबंधन के सभी साथियों का आभारी हूं कि उन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। हम 20 साल पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे।” उन्होंने वर्तमान ‘डबल इंजन’ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इसका एक इंजन भ्रष्टाचार पर और दूसरा अपराध पर चलता है। यादव ने बेरोजगारी, विकास और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जोर दिया, जो गठबंधन का मुख्य एजेंडा बनेगा। सम्मेलन में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, सीपीआई(एमएल) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य और अन्य नेता भी उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि और गठबंधन की चुनौतियां:
यह घोषणा पिछले कई हफ्तों से चले अटकलों के बीच आई है, जब आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर मतभेद उभरे थे। आरजेडी ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री चेहरा बनाने पर जोर दिया था, जबकि कांग्रेस ने गठबंधन की एकजुट छवि बनाए रखने की बात कही। अशोक गहलोत को मध्यस्थ के रूप में पटना भेजा गया, जहां उन्होंने बुधवार को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद विवाद सुलझ गए और संयुक्त घोषणा का रास्ता साफ हो गया।
महागठबंधन ने स्पष्ट किया कि चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, और गठबंधन संयुक्त घोषणा-पत्र (मेनिफेस्टो) 28 अक्टूबर को जारी करेगा। इसके अलावा, तेजस्वी और राहुल गांधी के संयुक्त रैलियों की योजना भी बनाई गई है। गठबंधन ने एनडीए पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ताधारी गठबंधन ने अभी तक अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है, जो उनकी कमजोरी को दर्शाता है।
जनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रभाव:
इस घोषणा पर जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा, “लालू यादव के ‘जंगल राज’ की वापसी में तेजस्वी का चेहरा होना स्वाभाविक था।” उन्होंने दावा किया कि जनता इस बार जन सुराज को मजबूत विकल्प के रूप में देखेगी। वहीं, भाजपा ने गठबंधन के पोस्टर पर केवल तेजस्वी की तस्वीर होने पर कटाक्ष किया, इसे ‘एकतरफा’ बताते हुए। लेकिन महागठबंधन नेताओं ने इसे खारिज करते हुए कहा कि एकता ही उनकी ताकत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव का चेहरा बनना गठबंधन को युवा वोटरों और पिछड़े वर्गों के बीच मजबूत करेगा। 2020 के चुनाव में महागठबंधन नजदीकी मुकाबले में हार गया था, लेकिन इस बार वे जनादेश को दोहराने का दावा कर रहे हैं। तेजस्वी ने हाल ही में जीविका दीदियों के लिए सुधारों की घोषणा की थी, जिसमें उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा और वित्तीय लाभ देने का वादा शामिल है।
बिहार की सियासत में नया मोड़:
यह घोषणा बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो विपक्ष को नई ऊर्जा देगी। महागठबंधन का दावा है कि वे विकास, रोजगार और न्याय पर आधारित एजेंडे से एनडीए को चुनौती देंगे। अब सारी निगाहें 28 अक्टूबर के मेनिफेस्टो और चुनावी रैलियों पर हैं। बिहार की जनता को परिवर्तन की उम्मीद है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी का नेतृत्व कितना प्रभावी साबित होता है।
