by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 6 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा के 243 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की, जो राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी करने के लिए मतदान दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को एक साथ की जाएगी। यह चुनाव न केवल राज्य की सत्ता की दिशा तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा, खासकर बेरोजगारी, प्रवासन और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, जिसमें विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के बाद तैयार मतदाता सूची का उपयोग होगा।
चुनाव कार्यक्रम का विस्तृत विवरण:
ईसीआई के अनुसार, बिहार में कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 6 नवंबर 2025 को होगा, जिसमें राज्य के कुछ हिस्सों में वोटिंग होगी। दूसरा चरण 11 नवंबर 2025 को बाकी क्षेत्रों में संपन्न होगा। वोटों की गिनती सभी क्षेत्रों में एक साथ 14 नवंबर को होगी, जिससे नई सरकार का गठन संभव हो सके। आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि, नाम वापसी और अन्य प्रक्रियाओं का भी ब्यौरा दिया है, जो उम्मीदवारों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।
चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बिहार चुनाव राज्य की आबादी और क्षेत्रीय चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दो चरणों में कराया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता मतदाताओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” मतदान केंद्रों की संख्या में वृद्धि की गई है, और ईवीएम तथा वीवीपैट का उपयोग अनिवार्य होगा। इसके अलावा, सीवीआईजिल ऐप के माध्यम से शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया गया है।
वोटर लिस्ट संशोधन: 98.2 प्रतिशत दस्तावेज प्राप्त
चुनाव से पहले आयोग ने 24 जून 2025 को विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की अधिसूचना जारी की थी, जिसमें सभी मतदाताओं को फॉर्म भरकर अपनी जानकारी अपडेट करने का निर्देश दिया गया। 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई, और 23 अगस्त तक 98.2 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त हो चुके थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि जो मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, वे फॉर्म 6 या 7 भरकर अपनी स्थिति सुधार सकते हैं। जून 2025 तक की अंतिम सूची में करीब 7.6 करोड़ मतदाता दर्ज हैं, जिसमें युवा और महिला वोटरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस संशोधन प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों ने बहस की थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कई नाम गायब हो गए, लेकिन मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खारिज करते हुए कहा कि जिला स्तर पर कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई। यह अभियान मतदान प्रतिशत बढ़ाने में सफल रहा, क्योंकि पिछले चुनाव में 57.05 प्रतिशत मतदान हुआ था।
राजनीतिक परिदृश्य: एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन की जंग
बिहार की 243 सीटों वाली विधानसभा में वर्तमान में एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) का बहुमत है, जिसमें भाजपा के 80, जद(यू) के 45, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के 4 विधायक और दो निर्दलीय शामिल हैं, कुल 131 सीटें। विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास 111 सीटें हैं, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो जद(यू) के नेता हैं, ने हाल ही में आरजेडी के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज किया, हालांकि वे अपनी राजनीतिक चालबाजियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
2020 के चुनावों में एनडीए ने 125 सीटें जीती थीं, लेकिन विपक्ष ने कड़ी टक्कर दी। इस बार के मुद्दे स्थानीय और सामाजिक-आर्थिक हैं – बेरोजगारी और प्रवासन प्रमुख हैं। दलों के घोषणापत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का वादा किया गया है, क्योंकि लाखों बिहारी युवा अन्य राज्यों में काम की तलाश में जाते हैं। राहुल गांधी ने अगस्त 2025 में बिहार यात्रा की, जहां उन्होंने मतदाता सूची की खामियों और चुनावी सुधारों पर जोर दिया।
प्रमुख दलों की रणनीतियाँ:
एनडीए: भाजपा और जद(यू) का गठबंधन केंद्र की नीतियों पर आधारित है। नीतीश कुमार ने विकास और बुनियादी ढांचे पर फोकस किया है, जबकि भाजपा हिंदुत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को उठा रही है। गठबंधन ने सीमांचल क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश की है।
इंडिया गठबंधन: आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों का संयुक्त मोर्चा सामाजिक न्याय और जाति जनगणना पर जोर दे रहा है। लालू प्रसाद यादव के परिवार ने पिछड़ी और दलित वोटों को एकजुट करने का अभियान चलाया है। कांग्रेस ने मतदाता सूची विवाद को मुद्दा बनाया, जबकि वाम दल मजदूरों के अधिकारों पर फोकस कर रहे हैं।
अन्य दल: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने इंडिया गठबंधन में जगह न मिलने पर स्वतंत्र रूप से ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ शुरू की। असदुद्दीन ओवैसी ने 2020 में पांच सीटें जीती थीं, और वे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
प्रमुख मुद्दे और चुनौतियाँ:
चुनाव अभियान में बेरोजगारी, प्रवासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाढ़ प्रबंधन प्रमुख रहे। बिहार की 12 करोड़ आबादी में युवाओं की संख्या अधिक है, इसलिए रोजगार सृजन का वादा हर दल का केंद्र बिंदु है। इसके अलावा, जाति आधारित राजनीति और महिलाओं के लिए आरक्षण जैसे मुद्दे भी गर्म हैं। आयोग ने कोविड जैसी महामारी या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था का ऐलान किया है। सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात किए जाएंगे, और अवैध पैसा व शराब पर सख्ती बरती जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करेगा। बिहार की 40 लोकसभा सीटें राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष: लोकतंत्र का उत्सव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राज्य के भविष्य को आकार देगा, जहां मतदाता विकास, न्याय और स्थिरता के बीच चयन करेंगे। ईसीआई की घोषणा के साथ अब अभियान तेज हो जाएगा, और 14 नवंबर को नतीजे नई सरकार का मार्ग प्रशस्त करेंगे। यह चुनाव न केवल राजनीतिक दलों की परीक्षा लेगा, बल्कि बिहार की युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को भी प्रतिबिंबित करेगा। आयोग ने सभी दलों से शांतिपूर्ण अभियान चलाने की अपील की है, ताकि लोकतंत्र का यह पर्व बिना किसी बाधा के संपन्न हो।
