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by-Ravindra Sikarwar

बिहार की राजनीतिक गतिविधियों में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, 6 नवंबर 2025 को विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 121 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से मतदान प्रक्रिया आरंभ हो गई। यह चरण राज्य के 18 जिलों में फैला हुआ है, जहां कुल 3.75 करोड़ पंजीकृत मतदाता 1,314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। कुल 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा के लिए यह चुनाव दो चरणों में हो रहा है, जिसमें दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। मतगणना और परिणाम घोषणा 14 नवंबर को निर्धारित है। यह चुनाव न केवल राज्य की सत्ता की दिशा तय करेगा, बल्कि विकास, रोजगार, प्रवासन और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जनता की राय को भी प्रतिबिंबित करेगा।

चुनाव की पृष्ठभूमि और कार्यक्रम:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की अधिसूचना 10 अक्टूबर को जारी हुई थी, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया 17 अक्टूबर तक चली। नामांकन पत्रों की जांच 18 अक्टूबर को हुई और 20 अक्टूबर अंतिम तिथि थी उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की। राज्य में कुल 7.42 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 3.92 करोड़ पुरुष और 3.50 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। प्रथम चरण में 10.72 लाख नए मतदाता और 7.78 लाख 18-19 वर्ष के युवा मतदाता पहली बार वोट डालेंगे।

चुनाव आयोग ने मतदान को सुगम बनाने के लिए 45,341 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं, जहां औसतन 818 मतदाता प्रति केंद्र हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा, लेकिन 5 बजे कतार में खड़े मतदाताओं को वोट डालने का अवसर मिलेगा। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट 1 अक्टूबर से लागू है, जिसके तहत नई योजनाओं की घोषणा या नीतिगत बदलाव प्रतिबंधित हैं। विशेष रूप से, मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) ने विवाद पैदा किया, जहां विपक्ष ने लाखों प्रवासी मजदूरों के बहिष्कार का आरोप लगाया, लेकिन आयोग ने इसे अस्वीकार कर दिया।

यह चुनाव वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल के समाप्त होने (22 नवंबर 2025) से ठीक पहले हो रहा है, जो राज्य की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण है।

प्रथम चरण के 121 विधानसभा क्षेत्र:
प्रथम चरण में 18 जिलों—पटना, दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, शेखपुरा, नालंदा, बक्सर, भोजपुर और खगड़िया—की 121 सीटों पर वोटिंग हो रही है। इनमें से कई क्षेत्र पारंपरिक रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, जहां जातिगत समीकरण और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं।

कुछ प्रमुख क्षेत्रों की सूची:

  • पटना जिला: बख्तियारपुर, दिघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, फतुहा, दानापुर।
  • दरभंगा जिला: गायघाट, कुशेश्वर स्थान, बेनीपुर, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, मित्रौर।
  • मुजफ्फरपुर जिला: गौशाला, कदिराबाद, कुंवरपुर, साहेबगंज, बैरिया, पारू, गजहर।
  • सिवान जिला: जिरादेई, रघुनाथपुर, देकुली, सिवान, जयपुर, महराजगंज, अम्हौर।
  • अन्य महत्वपूर्ण: वैशाली के महुआ, हाजीपुर; सारण के मांझी, एकमा; भोजपुर के आरा, आगहन आदि।

ये क्षेत्र ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के मतदाताओं का मिश्रण रखते हैं, जहां प्रवासन और बेरोजगारी जैसे मुद्दे गूंज रहे हैं।

प्रमुख उम्मीदवार और दांव पर लगी प्रतिष्ठा:
प्रथम चरण में कई बड़े चेहरे मैदान में हैं, जो चुनाव को रोमांचक बना रहे हैं। कुल 1,314 उम्मीदवारों में से प्रमुख हैं:

  • तेजस्वी यादव (आरजेडी): महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार, महुआ सीट से लड़ रहे हैं। वे रोजगार और युवा मुद्दों पर जोर दे रहे हैं।
  • सम्राट चौधरी (बीजेपी): उपमुख्यमंत्री, अमरपुरा से उम्मीदवार। एनडीए की मजबूती के प्रतीक।
  • विजय कुमार सिन्हा (बीजेपी): विधानसभा अध्यक्ष, कटरा से मैदान में।
  • तेज प्रताप यादव (जेएसजेेडी): महुआ से, जनता दल (जनशक्ति) के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
  • पवन सिंह (बीजेपी): गायक-अभिनेता, भोजपुर से विकास के मुद्दे पर वोट मांग रहे हैं।
  • मैथिली ठाकुर (बीजेपी): 25 वर्षीय लोक गायिका, दरभंगा के अलीनगर से सांस्कृतिक अपील के साथ उतरीं।

ये उम्मीदवार न केवल अपनी सीटें बचाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि अपने गठबंधनों की दिशा भी तय करेंगे।

राजनीतिक दल और गठबंधन:
बिहार चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए (बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी(आरवी) आदि) और महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल) के बीच है। एनडीए सत्तारूढ़ है, जो 2020 में 125 सीटें जीत चुका था, जबकि महागठबंधन ने 110 हासिल कीं। इस बार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी नया दबाव पैदा कर रही है, जो दोनों गठबंधनों को चुनौती दे रही है।

मुख्य मुद्दे:

  • रोजगार और प्रवासन: विपक्ष ने 75 लाख प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को उठाया।
  • विकास और बुनियादी ढांचा: एनडीए सड़क, बिजली और शिक्षा पर दावा कर रहा है।
  • जातिगत समीकरण: यादव, कुर्मी, ईबीसी वोट बैंक निर्णायक होंगे।
  • महिला सशक्तिकरण: 35% महिलाएं मतदाता हैं, जो नारी सुरक्षा और शिक्षा पर फोकस कर रही हैं।

एलजेपी(आरवी) की सीट बंटवारे पर जेडीयू में असंतोष की खबरें आई हैं, जो गठबंधन की मजबूती को प्रभावित कर सकती हैं।

मतदान की शुरुआती तस्वीर और अपील:
मतदान शुरू होने के दो घंटे बाद सुबह 9 बजे तक 13.13% मतदान दर्ज किया गया, जो 11 बजे तक बढ़कर 27.65% हो गया। पटना में सबसे कम 23.71% टर्नआउट रहा, जबकि अन्य जिलों में उत्साह दिखा। सिवान में मतदाताओं को प्रमाण-पत्र देकर बधाई दी गई, और वैशाली में बुजुर्ग महिला को कंधे पर उठाकर मतदान केंद्र ले जाया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “पूर्ण उत्साह से वोट दें। पहला वोट, फिर जलपान।” तेजस्वी यादव ने लोकतंत्र और संविधान के हित में मतदान की अपील की। प्रियंका गांधी ने नौकरी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मतदान के बाद अपनी स्याही लगी उंगली दिखाई। आरजेडी सांसद मनोज झा ने सरकार बदलाव की उम्मीद जताई।

चुनाव आयोग ने डिजिटल वोटर आईडी (ई-ईपिक) डाउनलोड करने की सुविधा दी है, और वोटर हेल्पलाइन ऐप से पोलिंग बूथ चेक करने को कहा है।

चुनौतियां और अपेक्षाएं:
चुनाव में मौसम, प्रवासी वोटरों की अनुपस्थिति और विवादास्पद वोटर लिस्ट संशोधन चुनौतियां हैं। आयोग ने आईटी एप से पोलिंग पार्टियां रैंडमाइज की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा मतदाता और महिला वोट निर्णायक साबित होंगे। यह चरण न केवल प्रथम चरण का परिणाम देगा, बल्कि पूरे चुनाव की धारा भी तय करेगा।

बिहार के मतदाता आज लोकतंत्र के महापर्व में शिरकत कर रहे हैं, जो राज्य को नई दिशा देगा। सफल मतदान से ही मजबूत सरकार बनेगी।

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