by-Ravindra Sikarwar
बिहार में हुए विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने स्पष्ट और भारी बहुमत प्राप्त कर सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। इस जीत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में सामने आई है, जिसने गठबंधन की सफलता में अहम भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल 29 मंत्रियों में से 28 ने अपनी-अपनी सीटों पर विजय हासिल की। यह आंकड़ा एनडीए की रणनीति और जनसमर्थन की गहराई को दर्शाता है। दूसरी ओर, विपक्षी महागठबंधन को करारा झटका लगा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) महज 25 सीटों तक ही सीमित रह गई, जो उसके लिए अप्रत्याशित और निराशाजनक परिणाम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक जीत पर एनडीए को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बिहार की जनता ने विकास, स्थिरता और सुशासन की राजनीति पर एक बार फिर मुहर लगाई है। उन्होंने इसे “जनता का जोरदार जनादेश” बताते हुए कहा कि एनडीए ने विरोधियों की सारी उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया।
चुनाव में एनडीए की यह जीत कई कारकों का परिणाम है—मजबूत संगठन, नीतीश कुमार की लोकप्रियता, बीजेपी की राष्ट्रीय अपील और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन। परिणामों से साफ है कि बिहार की जनता ने जातिवादी और परिवारवादी राजनीति को नकारते हुए विकास और स्थिरता को प्राथमिकता दी है।
यह परिणाम आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगा और राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष के लिए एक बड़ा संदेश है। एनडीए अब नए जोश के साथ राज्य के विकास और सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
