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by-Ravindra Sikarwar

पटना: बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा नीत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने शुक्रवार को अपना संयुक्त चुनाव घोषणापत्र ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। यह घोषणापत्र युवाओं को एक करोड़ सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियां देने, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा राज्य को बाढ़-मुक्त और औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने का वादा करता है। पटना में आयोजित भव्य समारोह में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने संयुक्त रूप से इसे जारी किया। एनडीए गठबंधन में भाजपा, जनता दल (यूनाइटेड), लोजपा (आरवी), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। यह घोषणापत्र विपक्षी महागठबंधन के ‘तेजस्वी प्रण’ घोषणापत्र का प्रत्यक्ष जवाब माना जा रहा है, जिसमें हर परिवार को एक सरकारी नौकरी का वादा किया गया था। बिहार की 243 सीटों पर दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे।

घोषणापत्र जारी करने का संदर्भ: विपक्षी वादों के जवाब में एनडीए की रणनीति
बिहार चुनावों की सरगर्मी में महागठबंधन ने 28 अक्टूबर को अपना 32 पेज का घोषणापत्र ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ जारी किया था, जिसमें हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, महिलाओं को मासिक 2,500 रुपये की सहायता, पुरानी पेंशन योजना की बहाली तथा 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादे शामिल थे। इसके जवाब में एनडीए ने अपने 25 प्रमुख संकल्पों वाले ‘संकल्प पत्र’ को तेजी से तैयार किया, जो राज्य की युवा आबादी (लगभग 40% मतदाता 18-35 वर्ष के) की बेरोजगारी, महिलाओं की आर्थिक निर्भरता तथा बुनियादी ढांचे की कमियों पर केंद्रित है।

एनडीए के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “यह घोषणापत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विश्वास है। बिहार को जंगलराज से मुक्ति दिलाने का यह अवसर है।” भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इसे महाभारत के पांडवों जैसी एकता का प्रतीक बताया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एनडीए की जीत बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। घोषणापत्र जारी करने के समारोह में हजारों समर्थक उपस्थित थे, जहां नड्डा ने कहा, “एनडीए बिहार को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जोड़ेगा और हर जिले को औद्योगिक केंद्र बनेगा।”

प्रमुख वादे: युवा रोजगार, महिला सशक्तिकरण और पिछड़े वर्गों के कल्याण पर फोकस
एनडीए का ‘संकल्प पत्र’ राज्य के विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई है। घोषणापत्र में कुल 25 संकल्प हैं, जो निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित हैं:

  • रोजगार और कौशल विकास: राज्य के युवाओं के लिए एक करोड़ सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियां सृजित करना। हर जिले में मेगा स्किल सेंटर स्थापित करना, कौशल जनगणना कराना तथा प्रशिक्षित युवाओं को वैश्विक बाजारों में भेजना। प्रत्येक जिले में विनिर्माण इकाइयां लगाकर स्थानीय रोजगार बढ़ाना। इसके अलावा, आईटी पार्क और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) विकसित करना।
  • महिला सशक्तिकरण: एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना, ताकि वे सालाना कम से कम एक लाख रुपये कमाएं। ‘मिशन करोड़पति’ शुरू करना, जिसके तहत कुछ महिलाओं को करोड़पति बनाने में सहायता। महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करना। जीविका दीदियों को स्थायी रोजगार और मासिक वेतन सुनिश्चित करना।
  • पिछड़े वर्गों के लिए कल्याण: अत्यंत पिछड़े वर्गों (ईबीसी) के लिए 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता। ईबीसी कल्याण योजनाओं के लिए एक विशेष समिति गठित करना। अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए 2,000 रुपये की एकमुश्त सहायता।
  • कृषि और किसान कल्याण: न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी। कृषि निर्यात को दोगुना करना तथा ‘मेड इन बिहार’ अभियान चलाकर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना। बिहार को पांच वर्षों में बाढ़-मुक्त बनाना।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: किंडरगार्टन (केजी) से पोस्ट-ग्रेजुएशन (पीजी) तक मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना। स्वास्थ्य बीमा को 25 लाख रुपये तक बढ़ाना।

बुनियादी ढांचे का विकास: एक्सप्रेसवे, मेट्रो और औद्योगिक पार्क
घोषणापत्र में बुनियादी ढांचे को राज्य की प्रगति का आधार बताया गया है। प्रमुख वादों में सात नए एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है, जो जिले को औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब से जोड़ेगा। पटना के अलावा चार अन्य शहरों में मेट्रो सेवाएं विस्तारित करना। दस नए औद्योगिक पार्क स्थापित करना तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ मिशन के तहत 100 एमएसएमई पार्क विकसित करना। इसके अलावा, पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करना तथा हर जिले में विनिर्माण इकाइयां लगाना।

विपक्षी घोषणापत्र से तुलना: नौकरी और महिला सहायता पर टक्कर
महागठबंधन के घोषणापत्र में 1.25 करोड़ सरकारी नौकरियां, हर परिवार को एक नौकरी, अनुबंधित कर्मचारियों को स्थायी करना तथा महिलाओं को मासिक 2,500 रुपये की ‘माई-बहिन मान योजना’ का वादा था। एनडीए ने इसे ‘अवास्तविक’ बताते हुए कहा कि उनका वादा कौशल-आधारित और वैश्विक रोजगार पर केंद्रित है। एनडीए ने विपक्ष पर ‘जंगलराज लौटाने’ का आरोप लगाया, जबकि महागठबंधन ने एनडीए पर ‘नीतीश कुमार को कठपुतली बनाने’ का इल्जाम लगाया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: एनडीए की एकजुटता और विपक्ष का पलटवार
घोषणापत्र जारी होने के बाद एनडीए नेताओं ने एकजुटता का संदेश दिया। चिराग पासवान ने कहा, “यह युवाओं का सशक्तिकरण का दस्तावेज है।” उपेंद्र कुशवाहा ने पिछड़े वर्गों के वादों को सराहा। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “एनडीए के वादे कागजी हैं, जबकि हमारा घोषणापत्र बिहार की जनता का प्रण है।” भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित अपमानजनक बयानों पर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की।

भविष्य की संभावनाएं: चुनावी रणनीति और जनता का फैसला
यह घोषणापत्र बिहार की 13 करोड़ आबादी के लिए एक विकास-केंद्रित विजन प्रस्तुत करता है, जो बेरोजगारी दर (7.6%) और प्रवासन की समस्या को संबोधित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नौकरी वादे चुनाव का मुख्य मुद्दा बनेंगे। एनडीए का लक्ष्य 2020 की 125 सीटों से अधिक हासिल करना है, जबकि महागठबंधन 2015 के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश में है। बिहार चुनाव न केवल राज्य की सियासत, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करेंगे। जनता अब देख रही है कि कौन सा ‘संकल्प’ वास्तविकता बनेगा।

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