by-Ravindra Sikarwar
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 243 सीटों वाली विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी मजबूत स्थिति कायम की है, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने भारी बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 87 सीटों पर आगे चल रही है, जो जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के 76 सीटों से अधिक है। एनडीए कुल 190 से अधिक सीटों पर बढ़त बना चुका है, जो बहुमत के आंकड़े 122 से कहीं ज्यादा है। यह जीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू के लिए भी राहत लेकर आई है, जो 2020 के 43 सीटों से उछाल मारकर 76 तक पहुंच गई है। वहीं, महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों का गठन) महज 43-54 सीटों तक सिमट गया है। मतगणना जारी है, लेकिन रुझान साफ बता रहे हैं कि बिहार में एनडीए की सत्ता बरकरार रहेगी।
चुनाव का पृष्ठभूमि और मतदान प्रक्रिया:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देश की राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा था, क्योंकि यह 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद पहला बड़ा राज्य चुनाव था। कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान दो चरणों में संपन्न हुआ: पहला चरण 6 नवंबर को 110 सीटों पर और दूसरा चरण 11 नवंबर को शेष 133 सीटों पर। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 7.45 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड 67.13 प्रतिशत रही। यह उच्च मतदान प्रतिशत एनडीए की विकास-केंद्रित मुहिम और विपक्ष के सामाजिक न्याय के एजेंडे दोनों को मजबूत बनाने में सहायक साबित हुआ।
चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 से अधिक रैलियां कीं, जहां उन्होंने ‘विकास की गति’ और ‘जंगलराज मुक्त बिहार’ का नारा दिया। वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नौकरी और जातिगत जनगणना पर जोर दिया। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (जेएसपी) ने भी 50 से अधिक सीटों पर दांव लगाया, लेकिन वह महज 0-2 सीटों तक सीमित रह गई। मतगणना पटना सहित सभी जिलों के केंद्रीयकृत केंद्रों पर सुबह 8 बजे शुरू हुई और दोपहर तक साफ रुझान उभर आए।
सीटों का विस्तृत बंटवारा: भाजपा की बढ़त और एनडीए का दबदबा
चुनाव आयोग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, एनडीए ने 194 सीटों पर बढ़त बना ली है, जो 2020 के 125 सीटों से काफी ऊपर है। भाजपा ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 87 पर आगे चल रही है, जो उसे सबसे बड़ी पार्टी बनाती है। जेडीयू, जो 2020 में कमजोर पड़ी थी, ने 101 सीटों पर उतरकर 76 पर मजबूत प्रदर्शन किया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (एलजेपी-आरवी) को 22-29 सीटें मिल रही हैं, जबकि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) (एचएएम-एस) को 4 सीटें। अन्य छोटे सहयोगी दलों को 7 सीटें मिली हैं।
वहीं, महागठबंधन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। आरजेडी, जो 2020 में 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, अब 41-59 सीटों तक सिमट गई। कांग्रेस को 14-19 सीटें मिल रही हैं, जबकि सीपीआई(एमएल)-लिबरेशन को 9-12 और अन्य वाम दल सीमित सफलता हासिल कर पाए। विकसशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और अन्य सहयोगी दलों को कोई खास सफलता नहीं मिली। जन सुराज पार्टी की हार ने प्रशांत किशोर की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर पानी फेर दिया।
कुछ प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों के रुझान:
- रघोपुर (आरजेडी का गढ़): तेजस्वी यादव के खिलाफ भाजपा के सतीश कुमार 3,000 वोटों से आगे, लेकिन बाद में तेजस्वी ने 219 वोटों की मामूली बढ़त हासिल की।
- छपरा: भाजपा की छोटी कुमारी 974 वोटों से आगे।
- कटिहार: भाजपा के तरकेश्वर किशोर ने 636 वोटों से बढ़त बनाई।
- दनापुर: आरजेडी के रित लाल रॉय 7,736 वोटों से आगे।
- पूर्णिया: स्वतंत्र उम्मीदवार पप्पू यादव ने महागठबंधन के पक्ष में वोट डाले, लेकिन प्रभाव सीमित रहा।
ये रुझान बताते हैं कि एनडीए ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाई है, खासकर महिला मतदाताओं के बीच।
प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रियाएं: उत्साह और निराशा का मिश्रण
भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटना में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे वाली रथ यात्रा निकालकर जश्न मनाया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “क्या राहुल और प्रियंका गांधी विदेश से लौटकर परिणामों का सामना करेंगे, या उनकी पार्टी की हार को अनदेखा करेंगे?” जेडीयू ने कहा, “नीतीश कुमार ने जंगलराज, भ्रष्टाचार और परिवारवाद को बिहार से बाहर धकेल दिया। सुशासन की जीत हुई है।”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “कुछ घंटों की प्रतीक्षा, और अच्छे शासन वाली सरकार लौट आएगी।” उनके मंत्री महेश्वर हजारी ने स्पष्ट किया कि नीतीश ही फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे। एनडीए के सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद संभालेंगे।
विपक्ष की ओर से तेजस्वी यादव ने कहा, “महिलाओं और युवाओं ने इंडिया गठबंधन का जोरदार समर्थन किया, लेकिन भाजपा ने झूठ, पैसे की ताकत और चोरी से चुनाव जीता।” पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हार पर सवाल उठाए, जबकि पप्पू यादव ने महागठबंधन पर भरोसा जताया। जेडीयू और भाजपा के बीच सबसे बड़ी पार्टी बनने की ‘मित्रवत लड़ाई’ ने गठबंधन की मजबूती दिखाई।
राजनीतिक विश्लेषण: विकास बनाम सामाजिक न्याय, महिला वोट का प्रभाव
यह चुनाव बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव का संकेत देता है। एनडीए की जीत विकास योजनाओं जैसे हर घर जल, उज्ज्वला और पीएम आवास के श्रेय से जुड़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिला मतदाताओं की ऊंची भागीदारी (67% से अधिक) ने जेडीयू को फायदा पहुंचाया, क्योंकि नीतीश कुमार की महिलाओं के सशक्तिकरण योजनाएं लोकप्रिय रहीं। भाजपा ने हिंदुत्व और मोदी फैक्टर से फायदा उठाया, जबकि आरजेडी का जातिगत समीकरण टूट गया।
2020 के मुकाबले एनडीए की सीटें 125 से बढ़कर 190 हो गईं, जो अमित शाह के 160 सीटों के अनुमान से भी ऊपर हैं। महागठबंधन की हार से तेजस्वी यादव को पांच साल इंतजार करना पड़ेगा। राजनीतिक पर्यवेक्षक कहते हैं कि यह जीत 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा को मजबूत आधार देगी।
अगले कदम: सरकार गठन और चुनौतियां
मतगणना पूरी होने के बाद एनडीए विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री का फैसला होगा, लेकिन नीतीश कुमार की वापसी तय मानी जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह पटना में जल्द हो सकता है। नई सरकार को बाढ़, बेरोजगारी और प्रवासन जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा। विपक्ष ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने पारदर्शिता का दावा किया है।
यह परिणाम बिहार के लिए नई उम्मीदें जगाते हैं। अधिक अपडेट के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट results.eci.gov.in देखें। बिहार की जनता ने विकास को प्राथमिकता दी, जो राज्य के भविष्य को आकार देगा।
