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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायणाचारी मिश्र और एडिशनल पुलिस कमिश्नर श्री पंकज श्रीवास्तव के निर्देश पर, क्राइम ब्रांच भोपाल ने शहर में अवैध हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त अपराध श्री अखिल पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अपराध श्री शैलेन्द्र सिंह चौहान और सहायक पुलिस आयुक्त अपराध श्री सुजीत तिवारी के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है।

संगठित नेटवर्क का खुलासा:
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि कुछ शातिर अपराधी वाहन चोरी और अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल हैं और निशातपुरा क्षेत्र में रह रहे हैं। सूचना के आधार पर, टीम ने दबिश देकर तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया और उनके कब्जे से तीन चोरी किए गए वाहन बरामद किए।

पूछताछ में आरोपियों ने मुख्तार खान नाम के एक व्यक्ति का खुलासा किया, जो अवैध हथियार सप्लाई करता है। क्राइम ब्रांच ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्तार को पकड़ा और उसके पास से एक उच्च गुणवत्ता वाली पिस्टल बरामद की। मुख्तार ने बताया कि यह पिस्टल उसने सुरेंद्र विश्वकर्मा से 32,000 रुपये में खरीदी थी। यह जानकारी मिलते ही भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम ने टीकमगढ़ में सुरेंद्र के ठिकाने पर छापा मारा।

पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा था अवैध कारोबार:
टीकमगढ़ में की गई गहन जाँच से पता चला कि सुरेंद्र विश्वकर्मा और उसका परिवार पिछले 40 वर्षों से अवैध हथियार बनाने का कारोबार कर रहा था। सुरेंद्र के पिता आनंदी विश्वकर्मा ने लगभग 40 साल पहले ट्रॉली और कृषि उपकरण बनाने की आड़ में चोरी-छिपे पिस्तौल बनाना शुरू किया था। यह कला उन्होंने अपने एक रिश्तेदार से सीखी थी। परिवार के सदस्य, जिनमें सुरेंद्र, उसका भाई धर्मेंद्र और उसके नाबालिग पोते भी शामिल थे, इस काम में पूरी तरह से लिप्त थे। हैरानी की बात यह है कि परिवार के कई सदस्यों के जेल जाने के बाद भी यह कारोबार जारी रहा।

सुरेंद्र खुद जनवरी 2025 में 7 साल की जेल की सजा काटने के बाद रिहा हुआ था और जेल से बाहर आते ही उसने फिर से यह काम शुरू कर दिया।

अत्याधुनिक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश:
इस बार, सुरेंद्र ने अवैध हथियार बनाने का काम और भी बड़े स्तर पर शुरू किया था। उसने टीकमगढ़ के रामगढ़ में एक दूरस्थ वेयरहाउस में एक पूरी फैक्ट्री स्थापित की थी। इस वेयरहाउस को उसने किराए पर लिया था और मालिक को भी पार्टनर बना लिया था, जिसे वह हर महीने 20,000 रुपये किराया देता था।

इस फैक्ट्री में दो लेथ मशीनें और अन्य अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए थे, जिनका उपयोग हथियार बनाने के लिए किया जाता था। पहले जहाँ केवल कलपुर्जे बाहर से लाकर असेंबलिंग की जाती थी, वहीं इस फैक्ट्री में हथियार के सभी कलपुर्जे खुद ही बनाए जाते थे ताकि मुनाफा ज्यादा हो।

अंतर्राज्यीय नेटवर्क और बिक्री का जाल:
सुरेंद्र और उसका परिवार स्थानीय स्तर पर जोखिम से बचने के लिए हथियारों की बिक्री मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के बाहर, खासकर उत्तर प्रदेश में करते थे। वे थोक में हथियार बेचते थे, जिससे न सिर्फ गोपनीयता बनी रहती थी बल्कि मुनाफा भी अधिक होता था।

इस पूरे ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने कई हथियार, मशीनें और उपकरण बरामद किए हैं, जिनका उपयोग दर्जनों अवैध हथियार बनाने में किया जा सकता था। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्तार खान, सुरेंद्र विश्वकर्मा, सैफ अली उर्फ रिंकू, मुमताज अली, और आनंदी विश्वकर्मा शामिल हैं। मुख्य आरोपी नरेंद्र प्रताप सिंह परमार अभी फरार है।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण:

  • मुख्तार खान: 30 साल, निवासी निशातपुरा, भोपाल। एक साल पहले सुरेंद्र से पिस्टल खरीदी थी।
  • सुरेंद्र विश्वकर्मा: 40 साल, निवासी टीकमगढ़। अवैध हथियार बनाने का मुख्य आरोपी, जिसका लंबा आपराधिक इतिहास है।
  • आनंदी विश्वकर्मा: सुरेंद्र का पिता, जिसने इस कारोबार की शुरुआत की।
  • सैफ अली उर्फ रिंकू: इंदौर निवासी। सुरेंद्र से एक कट्टा और एक पिस्टल खरीदी थी।
  • मुमताज अली: टीकमगढ़ निवासी। नरेंद्र के माध्यम से अवैध हथियार खरीदता था।

बरामद सामग्री:
क्राइम ब्रांच ने मौके से दो लेथ मशीनें, वेल्डिंग और कटाई की मशीनें, एक देसी पिस्टल, तीन आधी बनी हुई पिस्टल, बैरल, लोहे के फ्रेम, कारतूस, मैगजीन, और अन्य कच्चा माल जब्त किया है।

इस सफल ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच भोपाल के निरी. अनिल यादव, निरी. भूपेंद्र दीवान, उनि कलीमउद्दीन, सउनि सादिक खान, प्र. आर. मुकेश सिंह, प्र. आर. नारायण मीणा, आर. प्रदीप सिंह, आर. शैलेंद्र, आर. सुशील, आर. आलोक मिश्रा, आर. सतेंद्र और टीकमगढ़ पुलिस की सराहनीय भूमिका रही।

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