By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: मध्य प्रदेश के विद्यालयों में सर्दी के मौसम को देखते हुए शिक्षा विभाग ने छात्रों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े अहम बदलावों की घोषणा की है। इस संबंध में संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) डी.एस. कुशवाह ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ठंड बढ़ने के साथ कई जिलों से शिकायतें आ रही थीं कि यूनिफॉर्म पूरी न होने पर छात्रों को कक्षा से रोका जा रहा है या अलग रंग के स्वेटर पहनने पर रोक लगाई जा रही है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सर्दी में छात्रों को किसी भी तरह की यूनिफॉर्म की बाध्यता के कारण परेशान न किया जाए।
यूनिफॉर्म न होने पर भी कक्षा में प्रवेश से मना नहीं किया जाएगा
जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी छात्र के पास यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं है या वह ठंड के कारण अतिरिक्त कपड़े पहनकर आता है, तो उसे कक्षा में बैठने से रोका नहीं जा सकता। कई विद्यालयों में यह शिकायत मिली थी कि निर्धारित स्वेटर न होने पर बच्चों को गेट पर ही रोक दिया जाता है। शिक्षा विभाग ने ऐसे व्यवहार को अनुचित बताते हुए निर्देश दिया है कि सर्दी के मौसम में छात्रों की सेहत प्राथमिकता है, न कि कपड़ों का रंग या डिजाइन।
स्वेटर या गर्म कपड़ों के रंग–डिज़ाइन पर कोई रोक नहीं
बच्चों में सर्दी जनित बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए विभाग ने साफ कर दिया है कि स्कूल यह बाध्यता नहीं लगाएंगे कि स्वेटर केवल यूनिफॉर्म से मिलते-जुलते रंग का ही हो। आदेश में लिखा है कि ठंड के मौसम में कोई भी छात्र अपनी सुविधा अनुसार किसी भी रंग और डिजाइन का स्वेटर, जैकेट या गर्म कपड़ा पहन सकता है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे को आर्थिक या पारिवारिक कारणों से असुविधा न हो।
कक्षा के बाहर जूते–चप्पल उतारने की बाध्यता समाप्त
कई स्कूलों में प्रचलित एक नियम के अनुसार छात्रों को कक्षा में प्रवेश से पहले जूते और चप्पल बाहर उतारने पड़ते थे। लेकिन ठंड के मौसम में इससे बच्चों के बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने इस प्रथा को तुरंत समाप्त करने के आदेश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि सर्दी में फर्श ठंडा होने के कारण नंगे पैर बैठने से बच्चों को सर्दी, बुखार और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए किसी भी विद्यार्थी को जूते–चप्पल उतारने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
ठंड में बच्चों की सेहत को प्राथमिकता
जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सर्दी की तीव्रता को देखते हुए स्कूल प्रशासन को विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए। कई बार गरीब परिवारों के बच्चों के पास पर्याप्त गर्म कपड़े नहीं होते, ऐसे में कड़ाई बरतना बच्चों पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरह का बोझ डालता है। DPI ने कहा कि विद्यालयों का उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा देना है, न कि अनुशासन के नाम पर उन्हें दंडित करना।
सभी जिलों में आदेश का कड़ाई से पालन अनिवार्य
लोक शिक्षण संचालनालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल सरकारी स्कूलों के लिए ही नहीं, बल्कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर भी लागू होगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और किसी भी स्कूल में उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करें।
विभाग ने कहा कि यदि किसी शिक्षण संस्थान द्वारा छात्रों को यूनिफॉर्म या स्वेटर के नाम पर परेशान किया गया, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य की होगी।
शिक्षा विभाग के इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सर्दी के मौसम में कोई भी बच्चा वस्त्र संबंधी नियमों के कारण शिक्षा से वंचित न हो। विभाग ने यह भी दोहराया है कि स्कूलों का प्राथमिक कर्तव्य बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य है, न कि केवल बाहरी अनुशासन का पालन कराना। राज्यभर के शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे सर्दी के मौसम में विद्यार्थियों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है।
