By: Ravindra Sikarwar
रूस पर पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रतिबंधों का असर अब भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) पर भी साफ दिखने लगा है। कंपनी ने यूरोपियन यूनियन (EU) के ताजा नियमों को देखते हुए अपनी एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड रिफाइनरी में रशियन क्रूड ऑयल का इस्तेमाल पूरी तरह रोक दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब EU जनवरी 2026 से रूस के तेल से बने किसी भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट के आयात पर सख्त रोक लगाने जा रहा है।
जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल पर पूरी तरह ब्रेक
रिलायंस गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स संचालित करती है। यहां दो रिफाइनरी हैं—
- डोमेस्टिक मार्केट के लिए, और
- SEZ (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) रिफाइनरी, जहां से अधिकांश ईंधन निर्यात किया जाता है।
रूसी तेल के उपयोग पर रोक इसी SEZ रिफाइनरी में लागू की गई है।
कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक,
“20 नवंबर से हमारी SEZ रिफाइनरी में रूसी क्रूड ऑयल की खरीद बंद कर दी गई है। 1 दिसंबर से यहां से होने वाला हर निर्यात नॉन-रशियन क्रूड से तैयार उत्पादों के रूप में भेजा जाएगा।”
यह कदम इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि रिलायंस यूरोप में काफी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करती है और EU का नया नियम सीधे तौर पर इस कारोबार को प्रभावित करता है।
EU बैन और भू-राजनीतिक दबाव की वजह से उठा कदम
EU ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रूसी तेल से बने पेट्रोलियम उत्पाद, चाहे वे किसी तीसरे देश में ही रिफाइन क्यों न किए गए हों, उन्हें यूरोप में आयात नहीं किया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि किसी भी वैश्विक कंपनी के लिए यूरोपीय बाजार में बने रहना है, तो उसे रूसी तेल से दूरी रखनी होगी।
रिलायंस के लिए यूरोप एक बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए कंपनी ने बिना जोखिम उठाए नियमों का पालन करने का फैसला किया।
इसके साथ ही, अमेरिका भी लंबे समय से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बना रहा था। अमेरिका का दावा है कि रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक मदद पहुंचती है। हाल ही में अमेरिका ने रूस की दो बड़ी कंपनियों—
- Rosneft
- Lukoil
पर कड़े प्रतिबंध लगाए और इनसे जुड़ी सभी डीलिंग 21 नवंबर तक पूरी तरह बंद करने का निर्देश दिया। रिलायंस इन कंपनियों से बड़े पैमाने पर रशियन क्रूड खरीदती रही है, लेकिन अब कंपनी इनसे पूरी तरह दूरी बनाने की तैयारी में है।
भारत में क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और पिछले दो वर्षों में रूस भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। कम कीमतों के कारण कई भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदा था। लेकिन निर्यात-केंद्रित रिफाइनरियों को अब अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए अपना तेल-स्रोत बदलना पड़ रहा है।
रिलायंस का यह फैसला भारत के निर्यात बाजार के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कंपनी अब मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल के आयात को बढ़ा सकती है।
रशियन क्रूड पर निर्भरता कम करने का यह कदम वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य भारतीय रिफाइनरियां भी यूरोपीय प्रतिबंधों और अमेरिकी कड़े रुख के बीच क्या रास्ता चुनती हैं।
