by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली। देश के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय ने कई बड़े हथियार सौदों को मंजूरी दी है, जबकि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों को तेजी से अपनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही, हवाई यातायात में हो रही भारी वृद्धि के मद्देनजर सरकार एक नई पायलट प्रशिक्षण प्रणाली पर भी विचार कर रही है।
रक्षा मंत्रालय के प्रमुख हथियार सौदे:
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण हथियार खरीद समझौतों को हरी झंडी दी है, जिनका उद्देश्य तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) की मारक क्षमता को बढ़ाना है। इन सौदों में अत्याधुनिक मिसाइलें, निगरानी प्रणालियां, लड़ाकू वाहन और नौसेना के लिए नए जहाज शामिल हैं।
- थल सेना के लिए: इसमें बख्तरबंद वाहनों की खरीद और लंबी दूरी तक मार करने वाली आर्टिलरी तोपें शामिल हैं, जो सीमा पर भारत की सैन्य ताकत को और मजबूत करेंगी।
- नौसेना के लिए: नए युद्धपोत और पनडुब्बियों के अधिग्रहण से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और प्रभुत्व बढ़ेगा।
- वायु सेना के लिए: उन्नत रडार सिस्टम और मिसाइलों को शामिल करने से वायु सेना की हवाई रक्षा क्षमता में इजाफा होगा।
इन सौदों का एक बड़ा हिस्सा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू रक्षा कंपनियों से खरीदा जाएगा, जिससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
सीडीएस का तकनीकी पर जोर:
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने एक उच्च-स्तरीय बैठक में रक्षा बलों से आग्रह किया है कि वे युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुसार नई और उभरती हुई तकनीकों को जल्द से जल्द अपनाएं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), ड्रोन तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की बात कही है।
सीडीएस के अनुसार, भविष्य के युद्ध सिर्फ पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता से जीते जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें केवल पारंपरिक युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि साइबर युद्ध और सूचना युद्ध के लिए भी तैयार रहना होगा। इसके लिए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठनों (DRDO) और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
पायलट प्रशिक्षण प्रणाली में बदलाव:
देश में हवाई यातायात में हो रही तेजी से वृद्धि के कारण नागरिक उड्डयन क्षेत्र में कुशल पायलटों की मांग बढ़ गई है। इसे देखते हुए सरकार एक नई और अधिक प्रभावी पायलट प्रशिक्षण प्रणाली शुरू करने पर विचार कर रही है।
इस नई प्रणाली में आधुनिक सिमुलेटरों का उपयोग, प्रशिक्षण के मानकों को सख्त करना और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना शामिल होगा। इसका उद्देश्य भारतीय पायलटों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। यह कदम न केवल हवाई सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि भारत को विमानन क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।
कुल मिलाकर, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ये सभी पहलें भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
