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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: राजधानी के भेल दशहरा मैदान पर चल रहे भोपाल महोत्सव में रविवार की रात एक यादगार सूफियाना शाम बन गई। मशहूर सूफी-गजल गायक कुमार सत्यम ने अपनी जादुई आवाज और दिल को छू लेने वाली शायरी से पूरे मैदान को समां बांध दिया। हजारों दर्शक देर रात तक झूमते-गाते और तालियां बजाते रहे। लोग बार-बार “वाह-वाह” और “एक और” की फरमाइश करते नजर आए।

शाम जैसे ही गहराई, मंच पर रोशनी की लड़ियां जगमगाईं और कुमार सत्यम ने अपनी पहली गजल “तुम्हारी दौलत नई नई है…” से शुरुआत की। इसके बाद तो जैसे जादू सा छा गया। “तुम्हारी याद याद याद रहती है”, “हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह”, “चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल”, “आज फिर दिल ने एक तमन्ना की” जैसी सदाबहार रचनाओं ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया। दर्शकों के चेहरों पर मुस्कान और आंखों में नमी एक साथ नजर आई।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने किया। उन्होंने सबसे पहले भगवान गणेश की आरती उतारी और दीप प्रज्वलन किया। इस मौके पर मेले के अध्यक्ष सुनील यादव, मुख्य संयोजक विकास वीरानी, महामंत्री हरीश महेंद्र नामदेव, अखिलेश नगर समेत मेले की पूरी आयोजन टीम मौजूद रही। मंत्री जी ने मंच से कहा, “भोपाल महोत्सव सिर्फ मेला नहीं, हमारी संस्कृति और एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।”

साथ ही युवा पीढ़ी को अच्छा मनोरंजन भी देते हैं।”

कार्यक्रम का असली रंग तब बिखरा जब कुमार सत्यम ने ठुमरी और दादरा स्टाइल में “हमरी अटरिया पे आओ सांवरिया…” पेश किया। पूरी भीड़ एक साथ झूम उठी और महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई सुर में सुर मिलाने लगा। इसके बाद “वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ”, “चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले”, “तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी”, “लोग राहों में कांटे बिछाते रहे”, “फूल शबनम में डूब जाते हैं” और “जब कोई आसरा नहीं मिलता हम तुम्हारे गम में डूब जाते हैं” जैसी एक से बढ़कर एक रचनाओं ने रात को अविस्मरणीय बना दिया। हर गजल के बाद तालियों की गड़गड़ाहट इतनी जोरदार थी कि अगली रचना शुरू करने में कलाकार को मुश्किल से दो मिनट का ब्रेक ले पाते थे।

मेले में रविवार को रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ी। आयोजकों के अनुसार एक ही दिन में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग परिवार और दोस्तों के साथ पहुंचे। बच्चों के लिए झूले-चकरी, युवाओं के लिए खेल-तमाशे और बड़ों के लिए खाने की स्टॉल्स और सांस्कृतिक कार्यक्रम – हर तरफ रौनक छाई रही। रात दस बजे के बाद भी लोग मंच के सामने डटे रहे और कुमार सत्यम की आखिरी गजल तक तालियां बजाते रहे।

भोपाल महोत्सव इस बार पहले से कहीं ज्यादा भव्य हो गया है। दिन में हस्तशिल्प मेला, लोक नृत्य, कठपुतली शो और शाम ढलते ही देश के नामी कलाकारों का मंच – हर दिन कुछ नया और रोमांचक हो रहा है। आयोजक विकास वीरानी ने बताया, “आने वाले दिनों में कैलाश खेर, शान, नितिन मुकेश समेत कई बड़े कलाकार भोपाल आने वाले हैं। हमारा लक्ष्य है कि इस बार 10 लाख से ज्यादा लोग महोत्सव का आनंद लें।”

सचमुच, भोपाल की ये ठंडी दिसंबर की रातें अब सूफियाना सुरों और रंग-बिरंगी रोशनियों में डूब गई हैं। अगर आप अभी तक नहीं पहुंचे हैं तो जल्दी कीजिए – क्योंकि भोपाल महोत्सव का जादू कुछ ही दिनों का मेहमान है!

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