By: Yogendra Singh
Bhopal : नए शैक्षणिक सत्र के आगमन से पहले भोपाल जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर रखना शुरू कर दिया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें, कॉपियां या अन्य स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा।
हर वर्ष नए सत्र की शुरुआत पर कई अभिभावक यह शिकायत करते हैं कि स्कूल प्रबंधन उन्हें निर्धारित दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए कहता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

आठ अनुभागों में गठित की गई निगरानी टीमें
एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय दल करेंगे निरीक्षण
Bhopal प्रशासन ने जिले को आठ अनुभागों में विभाजित कर प्रत्येक क्षेत्र में निगरानी के लिए पांच सदस्यीय टीमों का गठन किया है। इन टीमों की अगुवाई संबंधित एसडीएम करेंगे। टीम में तहसीलदार और शासकीय स्कूलों के प्राचार्य भी शामिल रहेंगे।
एमपी नगर, टीटी नगर, कोलार, शहर वृत्त, बैरागढ़, गोविंदपुरा, हुजूर और बैरसिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में ये टीमें नियमित रूप से स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखेंगी। यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। निरीक्षण के दौरान स्कूलों से संबंधित दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया की भी जांच की जा सकती है।
नए सत्र में बढ़ता है खरीद का दबाव
प्रशासन ने पहले ही शुरू की तैयारियां
Bhopal वर्तमान में अधिकांश स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, जो मार्च तक समाप्त होंगी। अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने का दबाव बढ़ जाता है। इसी संभावित स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने अग्रिम तैयारी कर ली है।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी अभिभावक से शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ तुरंत जांच शुरू की जाएगी। दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार पर अनावश्यक आर्थिक भार न पड़े और शिक्षा प्रणाली निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनी रहे। अधिकारियों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी प्रकार का दबाव या अनुचित निर्देश मिलता है, तो वे तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें।
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र में अभिभावकों को राहत मिलेगी और स्कूलों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
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