Bhojshala Dispute: SC ने दिया संतुलित आदेश
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित हजार साल पुराने भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। यह विवाद खासकर बसंत पंचमी पर अधिक गर्म हो जाता है, जब हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने धार्मिक अधिकारों को लेकर लड़ते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण और संतुलित आदेश दिया है, जिसमें दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों का ध्यान रखा गया है।
Bhojshala Dispute: भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व
भोजशाला का इतिहास लगभग हजार साल पुराना है। इसे राजा भोज ने 1034 ईस्वी में महाविद्यालय के रूप में स्थापित किया था और हिंदू समाज इसे सरस्वती मंदिर के रूप में मानता है। 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने इसे ध्वस्त किया, जबकि बाद में 1401 और 1514 में कुछ हिस्सों में मस्जिद का निर्माण कराया गया। 1875 में खुदाई में सरस्वती प्रतिमा मिली थी, जिसे अंग्रेजों ने लंदन ले जाया। हिंदू संगठन इसे राजा भोज कालीन इमारत मानते हैं और इसे मंदिर घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
Bhojshala Dispute: विवाद के मुख्य बिंदु
विवाद का केंद्र है कि हिंदू पक्ष चाहता है कि परिसर में सरस्वती प्रतिमा स्थापित की जाए और पूजा पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से की जाए। वहीं मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि वे लंबे समय से नमाज पढ़ते आ रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच प्रशासन ने समय सीमा और प्रवेश-निकास मार्ग निर्धारित किए हैं। 1902 और 1933 में हुए सर्वे और अनुमति, तथा 1995–2003 के प्रशासनिक आदेश इस विवाद के कानूनी इतिहास को दर्शाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा और हवन करने की अनुमति दी है। वहीं मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और अलग प्रवेश-निकास मार्ग तय करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोनों पक्षों को संयम और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की गई है।
प्रशासन की तैयारी और आगे की रणनीति
भोजशाला में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद धार कलेक्टर ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। लगभग 8 हजार पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से आदेश की अलग-अलग व्याख्या न करने की अपील की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू पक्ष को नियमित दिनों में मंगलवार को भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रवेश और पूजा की अनुमति होगी, जबकि अन्य दिनों में प्रवेश शुल्क मात्र 1 रुपए और 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क रहेगा।
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