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Bhimbetka : विश्व धरोहर सूची में शामिल भीमबैठका के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों को संरक्षित और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड इन दुर्लभ चित्रों के संरक्षण और प्रदर्शन के लिए “रॉक आर्ट इको पार्क म्यूजियम” विकसित करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे प्राचीन विरासत को आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ सहेजा जा सके।

10 किलोमीटर में फैली अनमोल विरासत

Bhimbetka भीमबैठका क्षेत्र लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है, जहां सात पहाड़ियों पर 750 से अधिक शैलाश्रय स्थित हैं। इन गुफाओं में हजारों वर्ष पुराने शैलचित्र मानव सभ्यता के प्रारंभिक जीवन, शिकार, नृत्य और सामाजिक गतिविधियों की कहानी कहते हैं। कई शैलचित्र ऐसे दुर्गम वन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां आम पर्यटकों का पहुंचना कठिन है। प्रस्तावित संग्रहालय में जावरा, विनयका, भोंरावली और लाखा जुआर जैसे दूरस्थ क्लस्टरों के दुर्लभ शैलचित्रों की सटीक प्रतिकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिससे ये धरोहर व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच सकेगी।

पर्यावरण अनुकूल और अनुभवात्मक संग्रहालय

Bhimbetka रॉक आर्ट इको पार्क म्यूजियम को पारंपरिक कंक्रीट संरचना के बजाय पर्यावरण के अनुकूल अस्थायी ढांचों से विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य भीमबैठका के प्राकृतिक परिवेश को बनाए रखते हुए पर्यटकों को गुफाओं और शैलाश्रयों जैसा वास्तविक अनुभव देना है। यहां आने वाले लोग न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में पाए गए चुनिंदा शैलचित्रों को भी एक ही स्थान पर देख सकेंगे, वह भी विस्तृत जानकारी और दृश्य प्रस्तुति के साथ।

2028 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट

Bhimbetka परियोजना को वैश्विक स्तर पर भीमबैठका की पहचान और मजबूत करने के उद्देश्य से डिजाइन किया जा रहा है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है और भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया भी जारी है। लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक इस अनूठे संग्रहालय का निर्माण पूरा कर लिया जाए। डिजिटल तकनीक और संवेदनशील संरक्षण के माध्यम से यह पहल इतिहास को जीवंत करने के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता को भी नई दिशा देगी।

यह परियोजना न केवल प्रागैतिहासिक कला के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को मानव सभ्यता की जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनेगी।

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