by-Ravindra Sikarwar
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु एक टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर गए हैं, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना की एक कार्रवाई की तुलना 1971 में पाकिस्तान सेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ से की है। इस बयान के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें ‘भारतीय सेना का अपमान’ करने का आरोप लगाया है।
क्या था मामला?
दरअसल, विधानसभा में भाजपा-शासित राज्यों में बंगाली-भाषी लोगों पर हुए कथित हमलों और अत्याचारों की निंदा करने वाले एक प्रस्ताव पर बहस चल रही थी। इसी दौरान, ब्रात्य बसु ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक विरोध प्रदर्शन मंच को हटाने के लिए भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ से कर दी। इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर अत्याचार और नरसंहार किया था।
भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया:
मंत्री के इस बयान पर विधानसभा में तत्काल हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बसु की टिप्पणी को विधानसभा के रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। जब स्पीकर ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो भाजपा विधायकों ने “भारतीय सेना जिंदाबाद” के नारे लगाए और सदन से वॉकआउट कर दिया। बाद में विरोध प्रदर्शन के कारण अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।
शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मंत्री ब्रात्य बसु ने कल भारतीय सेना द्वारा अवैध ढांचों को हटाने की कार्रवाई की तुलना 1971 में बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई से की। हम इस तरह की तुलना को हटाने की मांग करते हैं। वह इन दोनों की तुलना नहीं कर सकते।”
मंत्री की सफाई और आगे की राजनीति:
विवाद बढ़ने पर ब्रात्य बसु ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके शब्दों को “तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है”। उन्होंने कहा, “मैंने इसकी तुलना भारतीय सेना से नहीं की है। मैंने कहा है कि जिस तरह से पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश पर हमला किया, वह बहुत ही निंदनीय है। 25 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना ने पहले जगन्नाथ धाम और फिर ढाका विश्वविद्यालय पर हमला किया, उन्होंने आम लोगों को गोली मारी। यह कोई तुलना नहीं है।”
इस विवाद ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में एक और नया अध्याय जोड़ दिया है। भाजपा के पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि अगर वह विधानसभा में होते तो ब्रात्य बसु को सदन में ही “पीट देते”। यह घटना दर्शाती है कि देश की सबसे सम्मानित संस्थाओं में से एक, यानी सेना भी अब राजनीतिक विवादों का हिस्सा बन गई है।
