by-Ravindra Sikarwar
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया को और अधिक तेज तथा सुरक्षित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत की है। 4 अक्टूबर 2025 से शुरू हो रही इस नई व्यवस्था के तहत, बैंक अब चेक को कुछ ही घंटों में क्लियर कर देंगे, जिससे प्राप्तकर्ता के खाते में राशि उसी दिन जमा हो जाएगी। यह बदलाव चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) पर आधारित है, लेकिन अब बैच प्रोसेसिंग की बजाय निरंतर प्रोसेसिंग पर जोर दिया जाएगा, जो पहले की तुलना में 1-2 दिनों की देरी को समाप्त कर देगा।
वर्तमान व्यवस्था से नई व्यवस्था में अंतर:
पहले की व्यवस्था में चेक क्लियरेंस बैच मोड में होता था, जिसमें चेक जमा करने के बाद अगले दिन या उससे अधिक समय लगता था। अब, नई प्रणाली में चेक जमा होते ही उसकी स्कैन की गई इमेज और मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन (एमआईसीआर) डेटा को तुरंत क्लियरिंग हाउस भेजा जाएगा। क्लियरिंग हाउस इसे ड्रॉई बैंक (जिस बैंक से पैसा निकलना है) को रीयल-टाइम में फॉरवर्ड करेगा, ताकि प्रोसेसिंग बिना देरी के हो सके।
नई प्रक्रिया का विस्तृत विवरण:
- जमा और प्रोसेसिंग: चेक जमा करने पर प्रेजेंटिंग बैंक (ग्राहक का बैंक) इसे स्कैन कर क्लियरिंग हाउस को भेजेगा। क्लियरिंग हाउस ड्रॉई बैंक को सूचित करेगा।
- कन्फर्मेशन विंडो: ड्रॉई बैंक को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक की समयावधि में चेक की पुष्टि करनी होगी। बैंक रीयल-टाइम में उत्तर देंगे।
- सेटलमेंट और क्रेडिट: सेटलमेंट होने के बाद क्लियरिंग हाउस प्रेजेंटिंग बैंक को सूचित करेगा, और बैंक ग्राहक के खाते में राशि को सेटलमेंट के एक घंटे के भीतर जमा कर देगा।
यह प्रक्रिया पूरे कार्य दिवस के दौरान निरंतर चलेगी, जिससे चेक क्लियरेंस में तेजी आएगी।
लागू करने के चरण:
आरबीआई ने इस बदलाव को दो चरणों में लागू करने की योजना बनाई है:
- चरण 1 (4 अक्टूबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक): सभी चेकों के लिए शाम 7 बजे की एक समान समय सीमा होगी। यदि ड्रॉई बैंक द्वारा 7 बजे तक कोई उत्तर नहीं मिलता, तो चेक स्वतः अनुमोदित माना जाएगा और सेटलमेंट हो जाएगा।
- चरण 2 (3 जनवरी 2026 से): यहां समय सीमा और सख्त होगी, जहां प्रत्येक चेक के लिए तीन घंटे की विंडो होगी। उदाहरण के लिए, यदि चेक सुबह 10 से 11 बजे के बीच आता है, तो दोपहर 2 बजे तक पुष्टि करनी होगी। तीन घंटे में पुष्टि न होने पर चेक स्वतः अनुमोदित हो जाएगा। यह चरण बैंकों को और अधिक कुशल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
सुरक्षा के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम:
चेक क्लियरेंस को सुरक्षित रखने के लिए आरबीआई ने पॉजिटिव पे सिस्टम को बढ़ावा दिया है। 50,000 रुपये से अधिक के चेकों के लिए इसकी सिफारिश की जाती है, जबकि 5 लाख रुपये से ऊपर के चेकों के लिए यह अनिवार्य है। यदि अनिवार्य मामलों में पॉजिटिव पे का उपयोग न किया जाए, तो चेक वापस कर दिया जाएगा।
- कैसे काम करता है: ग्राहक को चेक जारी करने से पहले बैंक को खाता संख्या, चेक नंबर, तारीख, राशि और लाभार्थी का नाम जैसी जानकारी पहले से प्रदान करनी होगी। चेक प्रस्तुत होने पर बैंक इन विवरणों की जांच करेगा और मैच होने पर ही क्लियर करेगा।
- लाभ: इससे धोखाधड़ी कम होगी और विवादों में आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत सुरक्षा मिलेगी, लेकिन केवल सत्यापित चेकों के लिए।
ग्राहकों की जिम्मेदारियां और लाभ:
ग्राहकों को इस नई व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी होंगी:
- खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें ताकि चेक बाउंस न हो।
- चेक पर सभी विवरण सही और स्पष्ट लिखें ताकि देरी या अस्वीकृति न हो।
इस बदलाव के लाभों में शामिल हैं:
- तेज क्लियरेंस से बेहतर ग्राहक अनुभव।
- व्यवसायों के लिए बेहतर नकदी प्रवाह प्रबंधन।
- विलंबित सेटलमेंट से जुड़े जोखिमों में कमी।
- कम त्रुटियां और कुल मिलाकर अधिक कुशल प्रक्रिया।
डिजिटल भुगतान जैसे यूपीआई, एनईएफटी और आरटीजीएस की बढ़ती लोकप्रियता के बीच चेक अभी भी उपयोग में हैं, और यह नई प्रणाली उन्हें और अधिक आधुनिक बनाएगी। बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ अधिल शेट्टी के अनुसार, कार्य घंटों के दौरान निरंतर क्लियरिंग दृष्टिकोण इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाता है।
यह बदलाव वित्तीय प्रणाली की दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्राहकों और बैंकों दोनों को लाभ पहुंचाएगा।
