by-Ravindra Sikarwar
जम्मू: जम्मू-कश्मीर में आज सार्वजनिक और निजी बैंकों में अवकाश रहा, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 2025 के अवकाश कैलेंडर के अनुसार आज महाराजा हरि सिंह की जयंती मनाई गई। महाराजा हरि सिंह, जो डोगरा वंश के अंतिम शासक थे, की जयंती को क्षेत्र में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के रूप में देखा जाता है। यह अवकाश नवरात्रि के त्योहारी मौसम के बीच आया है, जिसने इस दिन को और भी विशेष बना दिया। जम्मू-कश्मीर में यह अवकाश स्थानीय समुदायों के लिए उनकी ऐतिहासिक विरासत को याद करने का अवसर प्रदान करता है।
महाराजा हरि सिंह का योगदान:
महाराजा हरि सिंह का जन्म 23 सितंबर 1895 को जम्मू में हुआ था। वे 1925 से 1947 तक जम्मू-कश्मीर के शासक रहे और उनके शासनकाल में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और प्रशासनिक सुधार किए गए। विशेष रूप से, उन्होंने 1947 में भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय के लिए “इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन” पर हस्ताक्षर किए, जो भारत के इतिहास में एक निर्णायक क्षण था। उनकी जयंती को जम्मू क्षेत्र में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां लोग उनके योगदान को श्रद्धांजलि देते हैं। इस अवसर पर जम्मू में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें डोगरा संस्कृति को बढ़ावा देने वाले समारोह शामिल थे।
बैंक अवकाश और सेवाएं:
आरबीआई के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में महाराजा हरि सिंह की जयंती को आधिकारिक अवकाश के रूप में मान्यता दी गई है। इस दिन सभी सरकारी और निजी बैंक, सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक बंद रहे। हालांकि, ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं, जैसे नेट बैंकिंग और यूपीआई, निर्बाध रूप से उपलब्ध रहीं। जम्मू-कश्मीर बैंक, जो क्षेत्र का प्रमुख वित्तीय संस्थान है, ने भी अपने ग्राहकों को पहले ही सूचित कर दिया था कि डिजिटल लेनदेन और एटीएम सेवाएं अवकाश के दौरान प्रभावित नहीं होंगी।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व:
जम्मू में स्थानीय लोगों ने इस अवसर पर महाराजा हरि सिंह को उनके सामाजिक सुधारों के लिए याद किया। उनके शासनकाल में बाल विवाह को रोकने, शिक्षा को बढ़ावा देने और सामाजिक समानता के लिए कई कदम उठाए गए थे। जम्मू के निवासी रमेश शर्मा ने कहा, “महाराजा हरि सिंह की जयंती हमारे लिए गर्व का दिन है। उनकी विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है।” डोगरा सांस्कृतिक संगठनों ने स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें युवाओं को डोगरा इतिहास और संस्कृति से परिचित कराया गया।
त्योहारी माहौल के साथ उत्सव:
यह अवकाश नवरात्रि के पहले दिन के साथ मेल खाता है, जिसने इस उत्सव को और भी रंगीन बना दिया। जम्मू में मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों पर भारी भीड़ देखी गई, जहां लोग नवरात्रि पूजा के साथ-साथ महाराजा की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों में शामिल हुए। सोशल मीडिया पर #MaharajaHariSingh और #JammuKashmir जैसे हैशटैग ट्रेंड करते देखे गए, जहां लोगों ने उनकी उपलब्धियों को साझा किया। कुछ स्थानीय नेताओं ने महाराजा हरि सिंह के सम्मान में स्थायी स्मारक स्थापित करने की मांग भी उठाई।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:
हालांकि, कुछ इतिहासकारों और विश्लेषकों के बीच उनके शासनकाल को लेकर मतभेद भी रहे हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में उनकी जयंती को व्यापक रूप से एक एकीकृत क्षेत्रीय पहचान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी इस अवसर पर लोगों से एकता और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने की अपील की। यह अवकाश न केवल ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक समृद्धि को भी उजागर करता है।
