Bandhavgarh: उमरिया जिले के बांधवगढ़ में बाघों की मौत ने पर्यावरण और संरक्षण को किया चुनौतीपूर्ण, संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल
उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क में मात्र 20 दिनों के भीतर चार बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन मौतों ने न केवल वन्य जीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है।
बल्कि पार्क की पहचान और मध्यप्रदेश के ‘टाइगर स्टेट’ की प्रतिष्ठा पर भी खतरा पैदा कर दिया है।
Bandhavgarh: चौथे बाघ की मौत और कारण
इस महीने की चौथी मौत मानपुर वफ़र के अंतर्गत कुचवाही बीट, कक्ष क्रमांक पीएफ 342 में हुई।
अधिकारियों का कहना है कि यह मादा बाघ आपसी संघर्ष के कारण मरी है।
हालांकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग जांच में जुटा हुआ है।
वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि पार्क में लगातार बाघों की मौत एक गंभीर संकेत है।
अगर यह रफ्तार जारी रही, तो आने वाले समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क बाघों से विहीन हो सकता है।
Bandhavgarh: वन्यजीव प्रेमियों और कर्मचारियों की चिंता
इन घटनाओं ने वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्मियों के बीच निराशा और चिंता बढ़ा दी है।
वन विभाग के कुछ कर्मचारियों के अनुसार, इन घटनाओं को केवल ‘एक-दो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं’ के रूप में देखा जा रहा है।
जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जिम्मेदारी और निगरानी की कमी का परिणाम हो सकता है।
संरक्षण पर प्रश्नचिन्ह
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की इस तरह की लगातार मौत न केवल पार्क के पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित करती है।
बल्कि मध्यप्रदेश के टाइगर स्टेट की प्रतिष्ठा को भी खतरे में डाल सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया है कि निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने, जैविक संतुलन बनाए रखने और पार्क में बाघों के व्यवहार पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।
यदि वन्यजीव संरक्षण में यह लापरवाही जारी रही, तो बांधवगढ़ नेशनल पार्क की विश्व प्रसिद्ध पहचान धूमिल हो जाएगी।
बाघों की आबादी पर भी गंभीर संकट मंडरा सकता है।
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