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by-Ravindra Sikarwar

सीतापुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा सांसद आजम खान को आज उत्तर प्रदेश के सीतापुर जेल से रिहा कर दिया गया। वे क्वालिटी बार भूमि अतिक्रमण मामले में लगभग 23 महीने से जेल में बंद थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा गुरुवार को मिली जमानत के बाद उनकी रिहाई हुई, लेकिन सुबह 9 बजे निर्धारित समय से कुछ देरी हुई। जेल के बाहर सैकड़ों समर्थक इकट्ठा हुए, जिनमें उनके बड़े बेटे अब्दुल्ला आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के अलावा पार्टी के कई नेता शामिल थे। रिहाई के बाद आजम खान बिना मीडिया से बात किए बेटों के साथ रामपुर के लिए रवाना हो गए, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

आजम खान की रिहाई में थोड़ी सी झंझट आई जब जेल प्रशासन ने पाया कि रामपुर कोर्ट में एक मामले में लगाया गया 3,000 और 5,000 रुपये का जुर्माना जमा नहीं किया गया था। सुबह 10 बजे कोर्ट खुलने के बाद जुर्माना जमा कराया गया और फैक्स के जरिए सीतापुर जेल को सूचना भेजी गई। इसके बाद दोपहर 12 से 2 बजे के बीच वे जेल से बाहर आए। जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत जेल के आसपास निषेधाज्ञा लगा दी थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। फिर भी, समर्थकों के वाहनों की वजह से आसपास ट्रैफिक जाम हो गया। पुलिस ने पहले ही समर्थकों के वाहनों के नंबर नोट कर लिए थे।

अपने सिग्नेचर स्टाइल में सफेद कुर्ता-पायजामा और काली वेस्टकोट पहने आजम खान जेल गेट से निकले। उनके साथ उनके दोनों बेटे अब्दुल्ला आजम खान (जो फरवरी 2025 में 17 महीने की कैद के बाद रिहा हुए थे) और अब्दुल्ला आजम खान (जो लगभग दो साल बाद रिहा हुए) थे। जेल के बाहर सपा के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अनूप गुप्ता, मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा, जिला अध्यक्ष चत्रपति यादव जैसे नेता मौजूद थे। समर्थक बैनर और झंडे लहराते हुए नारे लगा रहे थे। हालांकि, आजम खान ने किसी से बात नहीं की और सीधे एक निजी वाहन में सवार होकर मगलगंज होते हुए लखीमपुर खेरी की ओर बढ़ गए। बाद में वे रामपुर पहुंचे।

क्वालिटी बार भूमि अतिक्रमण मामला 2013 का है, जब आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। आरोप था कि उन्होंने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर एक रिश्तेदार को रामपुर में क्वालिटी बार नामक स्थान पर सरकारी जमीन आवंटित करा दी। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को जमानत दे दी। उनके वकील मोहम्मद खालिद ने कहा, “अब कोई ऐसा मामला बाकी नहीं है जो उन्हें जेल में रख सके। सभी मामलों में जमानत मिल चुकी है।” आजम खान पर कुल 72 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई में वे पहले ही जमानत पर हैं। अन्य प्रमुख मामले भूमि हड़पने, धोखाधड़ी और 2008 के सड़क अवरोध से जुड़े हैं। सपा का दावा है कि ये सभी मामले राजनीतिक प्रतिशोध के तहत भाजपा सरकार द्वारा गढ़े गए हैं।

रिहाई के बाद सपा नेताओं ने खुलकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आजम खान की रिहाई पर अदालत का फैसला स्वागतयोग्य है। समाजवादियों को विश्वास था कि न्याय मिलेगा। उम्मीद है कि आगे कोई झूठा मुकदमा न दर्ज हो और भाजपा द्वारा अन्याय न हो।” सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा, “आजम खान पर झूठे केस लगाकर उन्हें फंसाया गया। पार्टी उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। भाजपा के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।” बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रवक्ता उमा शंकर सिंह ने भी कहा कि अगर आजम खान बसपा में शामिल होना चाहें, तो उनका स्वागत है, क्योंकि इससे पार्टी मजबूत होगी। इससे सपा-बसपा गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं।

आजम खान का राजनीतिक सफर लंबा रहा है। वे 1980 से सक्रिय हैं और 2019 तक सांसद रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद वे जेल पहुंचे। उनकी रिहाई से मुस्लिम वोट बैंक में सपा की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है, खासकर आगामी उपचुनावों और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिहाई सपा के लिए राहत है, लेकिन लंबित मामलों में आगे कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उनके समर्थक उन्हें “रामपुर का शेर” कहते हैं, और जेल से रिहाई को न्याय की जीत बता रहे हैं।

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