Azad Hind Islands: नेताजी की जयंती पर के. कविता का प्रस्ताव
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती, जिसे देशभर में पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया, इस बार एक नई राष्ट्रीय बहस का कारण बनी है। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष और पूर्व सांसद के. कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम बदलकर ‘आजाद हिंद’ करने की मांग उठाई है। उनके अनुसार यह पहल केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण अध्याय को औपचारिक सम्मान देने से जुड़ी है।
Azad Hind Islands: नेताजी और आजाद हिंद सरकार से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व
अपने पत्र में के. कविता ने उल्लेख किया कि वर्ष 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में बनी आजाद हिंद की अंतरिम सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ब्रिटिश शासन से मुक्त घोषित किया था। उनका तर्क है कि यह भारत का पहला ऐसा भूभाग था, जिसे औपचारिक रूप से स्वतंत्र घोषित किया गया—वह भी 1947 से चार साल पहले। इसी कारण यह द्वीप समूह स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है।
औपनिवेशिक नाम से मुक्ति की आवश्यकता
कविता का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक भूमिका निभाने के बावजूद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आज भी औपनिवेशिक दौर में दिए गए नाम से जाना जाता है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि इतिहास और आत्मसम्मान का प्रतीक होता है। उनके अनुसार, पूरे द्वीपसमूह का नाम बदलना औपनिवेशिक विरासत से पूर्ण मुक्ति की दिशा में एक सार्थक कदम होगा।
पहले बदले गए द्वीपों के नाम का हवाला
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 में रॉस, नील और हैवेलॉक जैसे प्रमुख द्वीपों के नाम बदले गए थे। हालांकि, के. कविता का मानना है कि अलग-अलग द्वीपों के नाम बदलने से ज्यादा जरूरी है कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश की पहचान बदली जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस संबंध में आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएं।
‘आजाद हिंद’: संप्रभुता और विचार का प्रतीक
के. कविता ने अपने पत्र में लिखा कि ‘आजाद हिंद’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि वह विचार है जिसने भारत को पहली बार संप्रभु राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा किया। उनके अनुसार, इस नाम को अपनाना नेताजी के उस सपने को साकार करेगा, जिसमें भारत पूरी तरह औपनिवेशिक प्रतीकों से मुक्त हो। उन्होंने यह भी कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ऐसी ऐतिहासिक शख्सियत हैं, जिन पर राजनीतिक मतभेद नहीं होने चाहिए।
निष्कर्ष
अंडमान और निकोबार को ‘आजाद हिंद’ नाम देने का यह प्रस्ताव इतिहास, पहचान और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय बन गया है, जिस पर आने वाले समय में व्यापक चर्चा की संभावना है।
Also Read This: Kathua Encounter: जैश का पाकिस्तानी आतंकी उस्मान मुठभेड़ में ढेर

