by-Ravindra Sikarwar
मुंबई: वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच भारत की कॉर्पोरेट दुनिया में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। वैश्विक मानव संसाधन सलाहकार फर्म आन के ‘वार्षिक वेतन वृद्धि और कर्मचारी टर्नओवर सर्वेक्षण 2025-26’ के अनुसार, 2026 में भारतीय कंपनियों द्वारा औसतन 9 प्रतिशत वेतन वृद्धि दी जाएगी। यह अनुमान 2025 में वास्तविक 8.9 प्रतिशत की वृद्धि से थोड़ा अधिक है, जो घरेलू उपभोग की मजबूती, निवेशों में तेजी और सरकारी नीतियों के समर्थन से संभव हो रहा है। सर्वेक्षण में 45 सेक्टरों को कवर किया गया है, जिसमें रियल एस्टेट/इंफ्रास्ट्रक्चर और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) सबसे अधिक वृद्धि की अगुवाई करेंगी। कंपनियां अब वेतन बढ़ोतरी को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि प्रतिभा को आकर्षित और बरकरार रखा जा सके।
सर्वेक्षण की मुख्य भविष्यवाणियां और आर्थिक पृष्ठभूमि:
आन के इस अध्ययन में भारत को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत अर्थव्यवस्था वाला देश बताया गया है। 2025 में वेतन वृद्धि 8.9 प्रतिशत रही, जबकि 2026 के लिए 9 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है। यह स्थिरता भारत की आर्थिक लचीलापन को दर्शाती है, जहां उपभोक्ता मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं और कर सुधार जैसे कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मुद्रास्फीति और मंदी के बावजूद, भारतीय बाजार में वेतन बजट स्थिर रहेंगे, जो उत्पादकता से जुड़े बोनस और लंबी अवधि के रखरखाव कार्यक्रमों पर जोर देगा। आन इंडिया के पार्टनर और रिवार्ड्स कंसल्टिंग लीडर रूपांक चौधरी ने कहा, “भारत की विकास गाथा मजबूत बनी हुई है, और कंपनियां वेतन रणनीतियों को सावधानीपूर्वक लागू कर रही हैं ताकि सतत विकास सुनिश्चित हो।”
सर्वेक्षण के अनुसार, 39 प्रतिशत भारतीय कंपनियां 8 से 9 प्रतिशत वृद्धि की योजना बना रही हैं, जो कुल औसत को बनाए रखने में सहायक होगी। डिजिटल कौशल वाली भूमिकाओं, जैसे एआई, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स, में प्रीमियम वेतन की उम्मीद है। उभरते क्षेत्रों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और फिनटेक में प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा तेज रहेगी।
सेक्टर-वार वेतन वृद्धि: रियल एस्टेट और एनबीएफसी सबसे आगे
सर्वेक्षण में विभिन्न उद्योगों की वेतन वृद्धि का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रियल एस्टेट/इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 2025 की 10.5 प्रतिशत वृद्धि के बाद 2026 में यह 10.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है, जो निवेशों की तेजी से प्रेरित है। इसी तरह, एनबीएफसी में 9.8 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाएगी। ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज, रिटेल और लाइफ साइंसेज जैसे क्षेत्रों में भी औसत से अधिक वृद्धि दर्ज होगी। निम्न तालिका 2025 की वास्तविक और 2026 की अनुमानित वृद्धि को दर्शाती है:
| उद्योग/सेक्टर | 2025 में वास्तविक वृद्धि (%) | 2026 में अनुमानित वृद्धि (%) |
| समग्र भारत | 8.9 | 9.0 |
| ऑटोमोटिव/वाहन निर्माण | 9.8 | 9.6 |
| बैंकिंग | 8.5 | 8.6 |
| रसायन उद्योग | 8.5 | 8.8 |
| ई-कॉमर्स | 8.9 | 9.2 |
| इंजीनियरिंग डिजाइन सेवाएं | 9.6 | 9.7 |
| इंजीनियरिंग/निर्माण | 9.4 | 9.2 |
| एफएमसीजी/उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं | 9.0 | 9.1 |
| ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स | 9.4 | 9.5 |
| लाइफ साइंसेज | 9.6 | 9.6 |
| गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) | 9.8 | 10.0 |
| रियल एस्टेट/इंफ्रास्ट्रक्चर | 10.5 | 10.9 |
| रिटेल | 9.0 | 9.6 |
| तकनीकी परामर्श और सेवाएं | 7.0 | 6.8 |
| तकनीकी प्लेटफॉर्म और उत्पाद | 9.3 | 9.4 |
यह डेटा दर्शाता है कि तकनीकी परामर्श क्षेत्र में वृद्धि सबसे कम रहेगी, जो वैश्विक आईटी मांग में कमी से प्रभावित है। वहीं, वित्तीय संस्थाओं में 2025 की 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 9.1 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
कर्मचारी टर्नओवर दर में कमी: स्थिरता का संकेत
सर्वेक्षण में एक सकारात्मक ट्रेंड कर्मचारी टर्नओवर (एट्रिशन) दर का उल्लेख है, जो 2025 में घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई। यह 2024 के 17.7 प्रतिशत और 2023 के 18.7 प्रतिशत से काफी कम है। महामारी के उच्च स्तर से नीचे आने वाली यह दर प्रतिभा बाजार की स्थिरता को इंगित करती है। कंपनियां अब अपस्किलिंग और विकास कार्यक्रमों पर निवेश कर रही हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों के लिए मजबूत प्रतिभा पूल तैयार हो। आन के एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी ने कहा, “कर सुधारों ने अनुपालन को सरल बनाया है और व्यवसायिक दक्षता बढ़ाई है, जिससे शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।”
सर्वेक्षण की पद्धति और सीमाएं:
आन का यह सर्वेक्षण 2025-26 अवधि के लिए तैयार किया गया है, जिसमें भारत के 45 प्रमुख सेक्टरों से डेटा एकत्र किया गया। हालांकि, विस्तृत पद्धति जैसे सैंपल साइज, डेटा संग्रह अवधि या प्रतिभागियों की संख्या का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन यह कंपनियों के वेतन बजट, टर्नओवर ट्रेंड्स और बाजार पूर्वानुमानों पर आधारित है। अध्ययन भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन पर जोर देता है, जहां घरेलू कारक वैश्विक चुनौतियों को संतुलित कर रहे हैं।
निष्कर्ष: प्रतिभा प्रबंधन पर फोकस
यह सर्वेक्षण भारतीय कॉर्पोरेट जगत में सतर्क आशावाद को प्रतिबिंबित करता है। कंपनियां अब आक्रामक वेतन वृद्धि से हटकर लक्षित पुरस्कारों, उत्पादकता-आधारित प्रोत्साहनों और लंबी अवधि के रखरखाव योजनाओं की ओर बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति के स्थिर होने और भर्ती गति बढ़ने से 2026 का पहला छमाही और मजबूत होगा। भारत जैसे बड़े अर्थव्यवस्थाओं में यह वृद्धि दर लगभग दहाई अंक के करीब बनी रहेगी, जो वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक उदाहरण है। कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल और उभरते कौशलों पर निवेश करें, ताकि प्रतिस्पर्धी बढ़त बनी रहे।
