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Report by: Dinanath Mauar

Aurangabad : बिहार के औरंगाबाद जिले के बारुण प्रखंड अंतर्गत जयगोविंद नगर (मखरा) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के लिए एक मिसाल पेश की है। जहाँ अक्सर लोग सरकारी सुविधाओं के अभाव में केवल शिकायतों का सहारा लेते हैं, वहीं यहाँ के ग्रामीणों ने अपनी मेहनत और सामूहिक भागीदारी से इतिहास रच दिया। जर्जर हो चुके पुराने डाकघर की जगह ग्रामीणों ने अपने निजी कोष से एक नया और भव्य भवन निर्मित किया है।

ऐतिहासिक विरासत और उपेक्षा का दंश

Aurangabad जयगोविंद नगर मखरा स्थित इस पोस्ट ऑफिस का इतिहास काफी पुराना है। इसकी स्थापना 4 नवंबर 1950 को हुई थी, जो उस समय क्षेत्र के संचार का मुख्य केंद्र हुआ करता था। समय के थपेड़ों और रखरखाव के अभाव में यह भवन पूरी तरह जर्जर हो गया। छतें रिसने लगीं और दीवारों में दरारें आ गईं, जिसके कारण विभाग को इसे गांव के अन्य अस्थाई ठिकानों पर स्थानांतरित करना पड़ा।

दशकों बीत जाने के बाद भी किसी सरकार या विभाग ने इस ऐतिहासिक डाकघर के पुनर्निर्माण की सुध नहीं ली। ग्रामीणों ने कई बार गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। प्रशासन की इसी बेरुखी ने ग्रामीणों को स्वयं कुछ करने के लिए प्रेरित किया।

युवाओं की पहल और सामूहिक जन-भागीदारी

Aurangabad जब सरकारी तंत्र विफल साबित हुआ, तो गांव के शिक्षित युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने कमान संभाली। इस पुनीत कार्य में गांव के प्रोफेशनल युवाओं ने अपनी विशेषज्ञता और संसाधन झोंक दिए। आईआईटीयन मनीष यादव, दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता अनीश तिवारी, प्रखंड हाउसिंग विभाग के सत्यदेव कुमार गुप्ता और डेहरी नगर निगम के संतोष यादव जैसे युवाओं ने ग्रामीणों के साथ मिलकर एक समिति बनाई।

इन युवाओं ने न केवल वित्तीय योगदान दिया, बल्कि पूरे गांव को इस मुहिम से जोड़ा। घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा किया गया और देखते ही देखते निर्माण कार्य शुरू हो गया। यह भवन मात्र ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की एकता और ‘स्वयं सहायता’ की भावना का प्रतीक है।

भव्य उद्घाटन और भविष्य की उम्मीदें

Aurangabad नवनिर्मित भवन का उद्घाटन हाल ही में एक गरिमामयी समारोह में किया गया। इस अवसर पर बारुण नगर पंचायत अध्यक्ष इन्दु देवी, शंकर पांडेय, पूर्व मुखिया रामजीवन पासवान और पोस्टमास्टर प्रेम शंकर ने संयुक्त रूप से फीता काटकर भवन का लोकार्पण किया।

अतिथियों ने ग्रामीणों के इस भगीरथ प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। पूर्व मुखिया रामजीवन पासवान ने कहा कि यदि हर गांव के नागरिक इसी तरह संगठित होकर अपने संसाधनों का प्रबंधन करें, तो विकास के लिए सरकारों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। पोस्टमास्टर प्रेम शंकर ने भी ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब बेहतर वातावरण में डाक सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी।

ग्रामीणों के इस प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया है कि “जहाँ चाह, वहाँ राह” होती है। आज यह नवनिर्मित डाकघर न केवल पत्र और पार्सल बाँटेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भरता का पाठ भी पढ़ाएगा।

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