Report by: Mohd Athar Khan, By: Yogendra Singh
Aurangabad : मोनिका की सफलता की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। बचपन से ही पढ़ाई में असाधारण रुचि रखने वाली मोनिका ने अपनी शुरुआती शिक्षा के दौरान ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था। उन्होंने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर यह संकेत दे दिया था कि वे भविष्य में कुछ बड़ा करने वाली हैं।
अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने कई वैश्विक मल्टीनेशनल कंपनियों में ऊंचे पैकेजों पर काम किया। हालाँकि, कॉर्पोरेट जगत की चमक-धमक उन्हें अधिक समय तक बांध कर नहीं रख सकी। उनके भीतर समाज के वंचित तबकों के लिए कुछ करने की जो तड़प थी, उसने उन्हें प्रशासनिक सेवा की ओर मोड़ने पर मजबूर कर दिया।

सफलता का सिलसिला: BPSC टॉपर से UPSC की 16वीं रैंक तक
Aurangabad मोनिका की उपलब्धि की सूची अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने अपनी मेहनत को कभी विराम नहीं दिया। वर्ष 2022 में उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला वर्ग में प्रथम स्थान और ओवरऑल छठी रैंक प्राप्त की थी। इसके बाद उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के लिए हुआ।
वर्तमान में वे IRTS अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, लेकिन उनका लक्ष्य इससे भी बड़ा था। प्रशिक्षण के कठिन शेड्यूल के बावजूद, उन्होंने अपने संकल्प को डगमगाने नहीं दिया और दोबारा यूपीएससी की परीक्षा दी। इस बार उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीख लेते हुए पूरे भारत में 16वां स्थान प्राप्त कर औरंगाबाद के गौरव को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।

प्रेरणा का स्रोत: माता-पिता का सपना और अटूट समर्पण
Aurangabad मोनिका अपनी इस ऐतिहासिक जीत का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, ई. ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव और भारती श्रीवास्तव को देती हैं। उनके पिता हमेशा से चाहते थे कि उनकी बेटी एक बड़ी अधिकारी बनकर समाज के जरूरतमंद लोगों की आवाज बने। मोनिका के अनुसार, “मेरे परिवार का अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है। उन्होंने मुझे कभी हार न मानने की प्रेरणा दी।”
आज औरंगाबाद जिले में उत्सव जैसा माहौल है। बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि मोनिका की यह सफलता बिहार की बेटियों के लिए एक मील का पत्थर है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य के प्रति अनुशासन और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी बाधा आपको इतिहास रचने से नहीं रोक सकती।
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