by-Ravindra Sikarwar
मजार-ए-शरीफ: अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्से में रविवार रात को आए 6.3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। इस भयावह प्राकृतिक आपदा में कम से कम 20 लोगों की जान चली गई है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। मृतकों और घायलों की संख्या में वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। भूकंप का केंद्र समंगान प्रांत के नखचिर जिले में था, जो मजार-ए-शरीफ शहर के निकट स्थित है। यह शहर अफगानिस्तान के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण शहरों में से एक है, जहां लगभग 5 लाख लोग निवास करते हैं।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 6.3 थी और इसकी गहराई मात्र 28 किलोमीटर (लगभग 17 मील) थी, जिसके कारण इसका प्रभाव बेहद विनाशकारी साबित हुआ। यूएसजीएस ने अपने पेजर सिस्टम में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया, जो दर्शाता है कि “उल्लेखनीय संख्या में हानि पहुंचने की संभावना है और आपदा व्यापक स्तर पर फैल सकती है।” इस तरह के अलर्ट का मतलब है कि राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। भूकंप का झटका ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी महसूस किया गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूकंप के बाद कम से कम पांच आफ्टरशॉक आए, जिनमें सबसे मजबूत का परिमाण 5.2 था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि भूकंप रविवार रात करीब 1:00 बजे (स्थानीय समय) आया, जब अधिकांश लोग सो रहे थे। अचानक धरती के हिलने से लोग घरों से बाहर भागे, लेकिन कई मकानों के ढहने से वे मलबे में दब गए। समंगान और बाल्ख प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. शराफत जमान अमर ने बताया कि 956 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से कई को मजार-ए-शरीफ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा, “स्थानीय अस्पतालों को और अधिक मरीजों के आने की तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।” तालिबान सरकार ने प्रारंभिक आंकड़ों में 20 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन अफगानिस्तान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएनडीएमए) ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी।
इस भूकंप ने मजार-ए-शरीफ की ऐतिहासिक ब्लू मस्जिद को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। यह मस्जिद अफगानिस्तान की सबसे पवित्र जगहों में से एक है, जहां पैगंबर मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद हजरत अली का मकबरा माना जाता है। बाल्ख प्रांत के प्रवक्ता हाजी जायद ने पुष्टि की कि मस्जिद का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, और आसपास के क्षेत्रों में मलबा बिखरा पड़ा है। इसके अलावा, भूकंप ने पूरे देश में बिजली आपूर्ति बाधित कर दी, जिसमें राजधानी काबुल भी शामिल है। राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति कंपनी दा अफगानिस्तान बरश्ना ने एक बयान में कहा कि मरम्मत कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है।
बचाव कार्यों में अफगान रेड क्रिसेंट और स्थानीय सुरक्षा बलों की टीमें जुटी हुई हैं। मलबे से जीवित लोगों को निकालने के लिए भारी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और संचार व्यवस्था के कारण राहत प्रयासों में बाधा आ रही है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वयक रिचर्ड ट्रेंचार्ड ने कहा, “हमने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, जहां बस्तियां सबसे अधिक हैं। सौभाग्य से, पूर्वी अफगानिस्तान के भूकंप की तुलना में यहां व्यापक विनाश कम दिखा, लेकिन फिर भी स्थिति चिंताजनक है।” उन्होंने कुनार प्रांत के अगस्त मास के 6.0 तीव्रता वाले भूकंप का जिक्र किया, जिसमें 2,200 से अधिक लोग मारे गए थे।
यह भूकंप तालिबान शासन के लिए एक और बड़ा झटका है, जो 2021 में सत्ता हासिल करने के बाद से कई प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। विदेशी सहायता में भारी कमी आने से देश की अर्थव्यवस्था पहले ही संकट में है। सेव द चिल्ड्रन संगठन की अफगानिस्तान निदेशक समीरा सैयद रहमान ने कहा, “यह भूकंप सर्दी के ठीक पहले आया है, जब तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। पूर्वी अफगानिस्तान के हजारों बच्चे पहले ही तंबुओं में रहने को मजबूर हैं, और अब उत्तरी क्षेत्र के परिवार भी भय और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।” 2023 में ही हेरात प्रांत में 6.3 तीव्रता के भूकंपों ने 2,000 से अधिक लोगों की जान ले ली थी। अफगानिस्तान दो प्रमुख सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं, जिससे यह भूकंपों के लिए अत्यधिक संवेदनशील हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सहायता का वादा किया है। भारत, जो तालिबान के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है, ने तत्काल मदद की पेशकश की है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियां राहत सामग्री भेजने की तैयारी में हैं। अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस आपदा पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “हमारी सरकार पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता पहुंचाएगी और पुनर्वास कार्य तेजी से करेगी।”
अधिक जानकारी के लिए अफगानिस्तान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है। स्थिति का मूल्यांकन जारी है, और सर्दी की दहलीज पर खड़े इस देश के लिए यह आपदा मानवीय संकट को और गहरा कर सकती है। दुनिया भर से अफगान लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।
