Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

चेन्नई: तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने दीवाली के अवसर पर एक कार्यक्रम में अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोग उन्हें बधाई देने में हिचकिचाते हैं, और उन्होंने केवल ‘जिनके पास आस्था है’ उन लोगों को दीवाली की शुभकामनाएं दीं। यह बयान 20 अक्टूबर 2025 को दिया गया, जो राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताते हुए डीएमके पार्टी को ‘एंटी-हिंदू’ करार दिया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि स्टालिन परिवार केवल ‘विश्वास करने वालों’ को शुभकामनाएं देकर हिंदुओं के साथ भेदभाव कर रहा है, जबकि अन्य धर्मों के त्योहारों पर सभी को बधाई देते हैं। इस घटना ने तमिलनाडु की राजनीति में धार्मिक समावेशिता पर बहस छेड़ दी है, जहां डीएमके की सेकुलर छवि पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उदयनिधि, जो मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पुत्र हैं, पहले भी सनातन धर्म विरोधी बयानों के कारण विवादों में रहे हैं, और यह नया प्रकरण उनकी छवि को और प्रभावित कर सकता है।

विवाद की शुरुआत और उदयनिधि का बयान:
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने दीवाली की पूर्व संध्या पर अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि कई लोग उन्हें फूलों का गुलदस्ता या किताबें देते समय दीवाली की बधाई देने में संकोच करते हैं, शायद इसलिए कि वे सोचते हैं कि इससे उदयनिधि नाराज हो सकते हैं। इसके बाद, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “जिनके पास आस्था है, उन सभी को दीवाली की शुभकामनाएं।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां इसे हिंदू त्योहार पर सशर्त शुभकामना के रूप में देखा गया। उदयनिधि के पिता और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी इसी तरह की शुभकामनाएं दीं, जो ‘विश्वास करने वालों’ तक सीमित थीं। यह डीएमके की सेकुलर नीति का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे हिंदू विरोधी करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उदयनिधि के पिछले सनातन धर्म संबंधी विवादास्पद टिप्पणियों की निरंतरता है, जहां उन्होंने सनातन धर्म को ‘समाप्त’ करने की बात कही थी।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया और आरोप:
भाजपा ने इस बयान को हिंदू समुदाय के प्रति असम्मान बताते हुए जोरदार हमला बोला। पार्टी ने डीएमके को ‘एंटी-हिंदू पार्टी’ कहा और आरोप लगाया कि स्टालिन परिवार हिंदू त्योहारों पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाता है।

  • तमिलिसाई सौंदरराजन का बयान: भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व तेलंगाना राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं सभी को दीवाली की शुभकामनाएं देती हूं, हम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की तरह नहीं हैं। हम हर किसी को बधाई देते हैं।” उन्होंने उदयनिधि और एमके स्टालिन की निंदा करते हुए कहा कि वे हिंदू भाइयों-बहनों की भावनाओं का सम्मान नहीं करते और अन्य समुदायों की अनदेखी कर रहे हैं। सौंदरराजन ने इंडी गठबंधन के सहयोगियों से अपील की कि वे डीएमके की इस भेदभावपूर्ण नीति की निंदा करें, क्योंकि गठबंधन के कई दल हिंदू धार्मिक विचारधारा और राष्ट्रीय संस्कृति में विश्वास रखते हैं। उन्होंने विधानसभा में की गई अपील का जिक्र किया, जिसे कथित रूप से अनसुना कर दिया गया।
  • एएनएस प्रसाद का आरोप: तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने डीएमके को ‘एंटी-हिंदू पार्टी’ बताते हुए कहा कि पार्टी में हिंदू त्योहारों के लिए शुभकामनाएं देने की बुनियादी शिष्टाचार की कमी है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद डीएमके को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान के अनुसार हर नागरिक के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, लेकिन पार्टी विशेष रूप से हिंदू धर्म के खिलाफ जहर उगलती है।

भाजपा ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश की, जहां उन्होंने डीएमके की नीतियों को हिंदू विरोधी बताया और कहा कि अन्य धर्मों के त्योहारों पर डीएमके सभी को शुभकामनाएं देती है, लेकिन हिंदू त्योहारों पर सशर्त बधाई।

डीएमके और स्टालिन परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं:
समाचार रिपोर्ट्स में डीएमके पार्टी या स्टालिन परिवार की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दर्ज की गई है। उदयनिधि स्टालिन ने अपने बयान में केवल इतना कहा कि लोग उन्हें बधाई देने में हिचकिचाते हैं, लेकिन भाजपा की आलोचना पर उन्होंने या उनके पिता ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। डीएमके की सेकुलर छवि के कारण, पार्टी अक्सर धार्मिक मामलों में तटस्थ रुख अपनाती है, लेकिन इस बार यह रणनीति उलटी पड़ गई लगती है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव:
यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है। भाजपा, जो राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, इस मुद्दे को हिंदू मतदाताओं को लामबंद करने के लिए इस्तेमाल कर रही है। सोशल मीडिया पर #AntiHinduDMK ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स डीएमके की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डीएमके की सेकुलर अप्रोच अच्छी है, लेकिन त्योहारों पर शुभकामनाएं सभी को देनी चाहिए ताकि कोई गलतफहमी न हो। यह घटना उदयनिधि के पिछले विवादों की याद दिलाती है, जहां उनके सनातन धर्म विरोधी बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर हंगामा मचाया था।

पृष्ठभूमि और संदर्भ:
डीएमके तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी है, जो सेकुलरिज्म और सामाजिक न्याय पर जोर देती है। उदयनिधि स्टालिन युवा चेहरा हैं, जो पार्टी के भविष्य के नेता माने जाते हैं। भाजपा राज्य में विपक्षी भूमिका में है और अक्सर डीएमके को हिंदू विरोधी बताती है। यह विवाद दीवाली के समय आया, जब पूरे देश में त्योहार की धूम है, इसलिए इसका प्रभाव गहरा हो सकता है।

यह घटना हमें सिखाती है कि राजनीतिक बयान कितने संवेदनशील हो सकते हैं, खासकर धार्मिक त्योहारों पर। भाजपा की आलोचना से डीएमके को अपनी छवि सुधारने का मौका मिल सकता है, लेकिन फिलहाल विवाद थमने के आसार नहीं दिख रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *