By: Ravindra Sikarwar
राजधानी भोपाल में सोमवार को उस समय तनावपूर्ण हालात बन गए, जब ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों ने एक आईएएस अधिकारी पर कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रोशनपुरा चौराहे पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र होकर नारेबाजी करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि संबंधित अधिकारी को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और सेवा से बर्खास्त किया जाए।
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ने लगे। पुलिस प्रशासन ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस को हालात संभालने के लिए वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए, हालांकि कुछ लोग पुलिस घेराबंदी पार कर बाणगंगा चौराहे तक पहुंचने में सफल रहे।
धक्का-मुक्की में घायल हुए बुजुर्ग और महिलाएं
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इनमें बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। हालात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
स्थिति नियंत्रित करने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर रातीबड़ क्षेत्र ले जाकर छोड़ दिया, जहां उन्हें तितर-बितर किया गया। इसके बाद जाकर प्रदर्शन शांत हो सका। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह के अनावश्यक बल प्रयोग से बचते हुए भीड़ को नियंत्रित किया गया।
पुलिस का पक्ष
एसीपी आशीष अग्रवाल ने बताया कि ब्राह्मण समाज के कुछ संगठनों द्वारा प्रदर्शन की सूचना केवल विज्ञापन के माध्यम से दी गई थी। प्रशासन को विधिवत पूर्व सूचना नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रण में रखा।
विवाद की जड़ और प्रशासनिक कार्रवाई
यह पूरा विवाद आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। इस बयान के सामने आने के बाद समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारी को तत्काल उप सचिव (कृषि विभाग) के पद से हटाकर जीएडी पूल में संलग्न कर दिया।
इसके साथ ही अधिकारी पर जाली और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पदोन्नति प्रमाण-पत्र हासिल करने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। इन आरोपों के मद्देनजर राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।
संगठनों में असंतोष, आंदोलन जारी रखने के संकेत
हालांकि सरकार द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद ब्राह्मण समाज के कई संगठन संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट सहित अन्य संगठनों का कहना है कि प्रस्ताव भेजना एक शुरुआती कदम जरूर है, लेकिन इससे आंदोलन समाप्त नहीं होता। उनका मानना है कि जब तक अंतिम और स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा भेजा गया प्रस्ताव अस्पष्ट है। इसमें यह साफ नहीं किया गया है कि सरकार अधिकारी को पूरी तरह सेवा से बर्खास्त करना चाहती है या केवल उनकी पदोन्नति रद्द करने का इरादा है। इस अस्पष्टता के कारण केंद्र सरकार प्रस्ताव को लौटाने पर भी विचार कर सकती है।
आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन
इसी असमंजस के चलते ब्राह्मण संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द ही ठोस और स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल कुछ दिनों के लिए प्रदर्शन स्थगित किया गया है, लेकिन अंतिम निर्णय आने तक माहौल तनावपूर्ण बना रह सकता है। प्रशासन और सरकार दोनों के लिए यह मामला संवेदनशील बना हुआ है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
