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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के सबसे चर्चित रेस्तरां “विंड एंड वेव्स” में बड़ा घोटाला सामने आया है। भोपाल नगर निगम से प्रतिनियुक्ति पर आए दो अधिकारियों ने महज डेढ़ महीने में 81 लाख रुपए से अधिक की खरीदी दिखाकर 11 लाख रुपए का सीधा गबन कर लिया। यह खेल जुलाई-अगस्त 2025 के बीच 33 फर्जी मांग-पत्रों और नोटशीटों के जरिए खेला गया। मामला तब खुला जब पर्यटन निगम के वित्त मुख्य महाप्रबंधक राजेश गुप्ता ने 3 सितंबर को अचानक फाइलों का औचक निरीक्षण किया।

फर्जी बिल, घटिया सामान और खाली गोदाम
बोट क्लब के किनारे बने विंड एंड वेव्स रेस्तरां में क्रूज बोट के लिए कोल्ड कॉफी मशीन, डेकोरेटिव सामान, डस्टबिन, क्रॉकरी, लाइटिंग और दूसरी जरूरी चीजों की खरीदी दिखाई गई थी। कागजों में कुल 80 लाख 81 हजार रुपए की खरीददारी दर्ज थी, लेकिन जब टीम मौके पर पहुंची तो गोदाम आधे से भी कम भरा था, वह भी घटिया क्वालिटी की चीजों से। एक बिल की जांच में तो 22 लाख 37 हजार रुपए का सामान दिखाया गया था, पर असल में सिर्फ 11 लाख का माल ही मिला। यानी बाकी पैसा अधिकारियों और सप्लायरों की जेब में चला गया।

एक ही परिवार की तीन फर्में, सारा खेल कोलार रोड से
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह यह कि सारी सप्लाई तीन फर्मों – मैसर्स श्री गणेश ट्रेडर्स, आदित्य इंटरप्राइजेस और मैसर्स सिद्धि विनायक ट्रेडर्स – से की गई थी। ये तीनों कंपनियां कोलार रोड के सागर प्रीमियम फेज-2 में रहने वाले संजय मुखर्जी, उनकी पत्नी देबजानी मुखर्जी और बेटे आदित्य मुखर्जी की हैं। मतलब एक ही परिवार ने तीन अलग-अलग नामों से टेंडर लिए और फर्जी बिल बनवाकर पैसे निकाल लिए।

दोनों आरोपी अधिकारी नगर निगम से आए थे प्रतिनियुक्ति पर
मामले के मुख्य आरोपी हैं:

  • अरविंद शर्मा – विंड एंड वेव्स के इकाई प्रबंधक (अक्टूबर 2024 से पदस्थ)
  • अनिल कुरुप – क्षेत्रीय प्रबंधक

दोनों मूल रूप से भोपाल नगर निगम के कर्मचारी हैं और पर्यटन निगम में प्रतिनियुक्ति पर आए थे। शिकायत क्षेत्रीय प्रबंधक हरनाथ सिंह दंडोतिया ने दर्ज कराई है, जिन्होंने इन दोनों अधिकारियों के साथ-साथ मुखर्जी परिवार के तीनों सदस्यों को भी आरोपी बनाया है।

क्राइम ब्रांच के हाथ में जांच, 32 और बिलों की होगी पड़ताल
नवंबर के आखिरी हफ्ते में पर्यटन निगम ने पूरी जांच रिपोर्ट के साथ भोपाल क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कराई। फिलहाल पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना और आपराधिक विश्वासघात का केस दर्ज हुआ है। पुलिस के पास अभी 32 और संदिग्ध बिलों की जांच बाकी है। साथ ही दोनों अधिकारियों की पूरी सर्विस के दौरान की खरीदी-फरोख्त भी खंगाली जा रही है।

प्रतिनियुक्ति का फायदा उठाकर मनमानी
जानकार बताते हैं कि प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारी अक्सर मूल विभाग और नए विभाग – दोनों की जवाबदेही से बचते हैं। यही वजह है कि अरविंद शर्मा और अनिल कुरुप ने बेखौफ होकर इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी की। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब तक प्रतिनियुक्ति की इस व्यवस्था में सख्त निगरानी और ऑडिट नहीं होगा, ऐसे घोटाले होते रहेंगे।”

पर्यटन निगम का विंड एंड वेव्स रेस्तरां भोपाल की शान माना जाता है। यहां आने वाले सैलानी और स्थानीय लोग ऊंची कीमत देकर सेवा लेते हैं, लेकिन अब पता चला है कि उस पैसे का बड़ा हिस्सा अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब में जा रहा था। क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों के बैंक खाते और संपत्ति की भी जांच शुरू कर दी है। जल्द ही गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

यह मामला एक बार फिर सरकारी महकमों में प्रतिनियुक्ति के नाम पर हो रही लूट की पोल खोलता है। अब देखना यह है कि इस घोटाले की जड़ तक पुलिस पहुंच पाती है या फिर यह भी बाकी मामलों की तरह दब जाएगा।

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