by-Ravindra Sikarwar
24 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक आपात बैठक के बाद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के विरोध में 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक पूरे देश में ‘भारत बंद’ का आह्वान किया। बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने स्पष्ट किया कि यह बंद शांतिपूर्ण होगा और इसका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता पर कथित हमले के विरुद्ध एकजुट आवाज बुलंद करना है। यह फैसला बोर्ड के विरोध अभियान के दूसरे चरण का हिस्सा है, जो अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद तेज हुआ है। बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की है कि वे अपने व्यवसाय, कार्यालय और दुकानें बंद रखकर इस आंदोलन में भाग लें, ताकि विधेयक को वापस लेने का दबाव बनाया जा सके।
वक्फ संशोधन विधेयक का विवरण: क्या हैं मुख्य बदलाव?
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025, जिसे यूनाइटेड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट (UWMEED एक्ट) के नाम से भी जाना जाता है, 1995 के मूल वक्फ अधिनियम में 44 संशोधनों को शामिल करता है। यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की 25 सिफारिशों पर आधारित है, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने का दावा करता है। प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
- केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों की संरचना में बदलाव: विधेयक राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषद में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को अनिवार्य करता है। इसके अलावा, विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों जैसे शिया, सुन्नी, बोहरा, आगा खानी और अन्य पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया गया है। बोर्डों में कम से कम दो मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, जो लिंग समानता को बढ़ावा देने का प्रयास माना जा रहा है।
- पंजीकरण और डिजिटलीकरण: सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से अनिवार्य किया गया है। इससे संपत्तियों की निगरानी आसान होगी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ावा देगा।
- महिलाओं के अधिकारों में सुधार: विधेयक महिलाओं को वक्फ संपत्ति में उत्तराधिकार के अधिकार सुनिश्चित करता है और बोर्डों में उनकी भागीदारी बढ़ाता है।
- अन्य प्रावधान: विधेयक वक्फ संपत्तियों को ‘सरकारी संपत्ति’ घोषित करने की प्रक्रिया को सरलीकृत करता है, यदि वे अवैध पाई जाती हैं। साथ ही, यह वक्फ बोर्डों को गैर-मुस्लिम सदस्यों के बहुमत वाले होने की संभावना खोलता है, जो हिंदू, सिख या ईसाई संपत्तियों के प्रबंधन से अलग है।
सरकार का दावा है कि ये बदलाव वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकेंगे, जो वर्तमान में 8.7 लाख एकड़ भूमि और हजारों करोड़ की संपत्ति पर फैली हैं। हालांकि, AIMPLB इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और 26 (धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन) का उल्लंघन मानता है।
AIMPLB का विरोध: धार्मिक अधिकारों पर हमला क्यों?
AIMPLB ने विधेयक को ‘मुस्लिम धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला’ करार दिया है। बोर्ड के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा, “यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को हड़पने की साजिश है। गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्डों में शामिल करके मुस्लिम समुदाय को अपनी धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन से वंचित किया जा रहा है।” बोर्ड का तर्क है कि हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध संपत्तियों के प्रबंधन में उनके समुदायों के सदस्य ही प्रमुख होते हैं, लेकिन वक्फ के लिए ऐसा भेदभाव क्यों?
बोर्ड ने अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट में विधेयक के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें इसे ‘भेदभावपूर्ण’ बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में सुनवाई स्थगित कर दी, जिसके बाद बोर्ड ने राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन तेज करने का फैसला किया। पहले चरण में मार्च-अप्रैल 2025 में दिल्ली, पटना, विजयवाड़ा और हैदराबाद में बड़े प्रदर्शन हुए, जहां हजारों लोगों ने भाग लिया। हैदराबाद में ‘सेव वक्फ, सेव कांस्टीट्यूशन’ रैली में कांग्रेस, बीआरएस, वाईएसआरसीपी और डीएमके जैसे दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बोर्ड ने अन्य अल्पसंख्यक समुदायों, दलित, आदिवासी और ओबीसी संगठनों से समर्थन मांगा है, और कहा कि यह मुद्दा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का है।
भारत बंद का आह्वान: कैसे होगा आयोजन?
भारत बंद 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। AIMPLB ने मुसलमानों से अपील की है कि वे इस दौरान अपनी दुकानें, व्यवसाय और कार्यालय बंद रखें। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह शांतिपूर्ण विरोध होगा, जिसमें कोई हिंसा या किसी समुदाय के खिलाफ नारे नहीं लगाए जाएंगे। विभिन्न शहरों में धरना, जागरूकता रैलियां और सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे।
बोर्ड के कार्यालय सचिव मोहम्मद वकील उद्दीन लतीफी ने कहा, “यह बंद मुस्लिम एकता का प्रतीक होगा। हम सरकार से विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग करते हैं।” बोर्ड ने विपक्षी दलों, सिविल सोसाइटी और अन्य धार्मिक संगठनों से समर्थन की अपील की है।
व्यापक प्रभाव: राजनीतिक बहस और चुनौतियां
यह आह्वान वक्फ विधेयक को लेकर राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। भाजपा ने इसे ‘सुधारवादी कदम’ बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद से आर्थिक प्रभाव पड़ेगा, खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में, लेकिन यह जागरूकता बढ़ाने में सफल हो सकता है।
AIMPLB का यह कदम यूनिफॉर्म सिविल कोड और प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 पर भी अपनी असहमति को दोहराता है। बोर्ड ने कहा कि वे सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष जारी रखेंगे। यह आंदोलन मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकता है।
