Ajit Pawar Legacy: एक युग का अंत
महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाली घटना में उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अजित पवार का बुधवार को निजी विमान दुर्घटना में निधन हो गया। बारामती में हुए इस हादसे में विमान में सवार सभी छह लोगों की मृत्यु ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया। जिला पंचायत चुनाव के प्रचार पर निकले अजित पवार का अचानक जाना न सिर्फ बारामती, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
Ajit Pawar Legacy: शरद पवार की छत्रछाया में सियासत की शुरुआत
अजित पवार ने वर्ष 1982 में अपने चाचा और दिग्गज नेता शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती वर्षों में उन्होंने सहकारी क्षेत्र में अहम भूमिकाएं निभाईं और चीनी कारखानों से लेकर पुणे सहकारी बैंक तक अपनी पकड़ बनाई। 1991 में वे बारामती से लोकसभा सांसद चुने गए, हालांकि बाद में उन्होंने यह सीट शरद पवार के लिए खाली कर दी।
Ajit Pawar Legacy: बारामती से सत्ता तक मजबूत पकड़
1995 में अजित पवार बारामती विधानसभा सीट से विधायक बने और इसके बाद लगातार सात बार विधायक चुने गए। करीब 45 वर्षों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने एक सांसद और सात बार विधायक के रूप में अपनी प्रभावशाली मौजूदगी दर्ज कराई। बारामती को उन्होंने अपना राजनीतिक गढ़ बनाया और यहीं से राज्य की राजनीति में अपनी निर्णायक भूमिका तय की।
मंत्री पदों से डिप्टी सीएम तक का सफर
अजित पवार ने कृषि, ऊर्जा, योजना और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2010 में पहली बार वे उपमुख्यमंत्री बने। 2019 में उन्होंने दो अलग-अलग सरकारों में यह पद संभाला, जबकि 2023-24 में शरद पवार से अलग होकर भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हुए। कुल मिलाकर वे छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे।
अलग राह और सियासी बगावत
2022 में जब एनसीपी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद उभरे, तब अजित पवार ने स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता चुना। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नए सत्ता समीकरण बनाए और उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।
व्यक्तिगत जीवन और विरासत
22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार का पारिवारिक जीवन सादा रहा। पत्नी सुनेत्रा पवार और पुत्र पार्थ व जय पवार उनके परिवार का हिस्सा हैं। शिक्षा अधूरी रहने के बावजूद उन्होंने राजनीतिक समझ और निर्णय क्षमता से अपनी अलग छवि बनाई।
अजित पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग के अंत जैसा है। उनकी राजनीतिक सूझबूझ, प्रशासनिक क्षमता और बारामती पर मजबूत पकड़ को लंबे समय तक याद किया जाएगा। अब राज्य की राजनीति में आगे क्या बदलाव होंगे, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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