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by-Ravindra Sikarwar

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एक दोहरी भूमिका निभा रही है – एक ओर यह नौकरियों में व्यवधान पैदा कर रही है, वहीं दूसरी ओर लाखों नए रोजगार सृजन के द्वार खोल रही है। नीति आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘एआई इकोनॉमी में रोजगार सृजन के लिए रोडमैप’ में चेतावनी दी है कि 2031 तक तकनीकी सेवा क्षेत्र में लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं, लेकिन सही रणनीति अपनाने पर अगले पांच वर्षों में 40 लाख नई नौकरियां पैदा की जा सकती हैं। यह रिपोर्ट भारत को वैश्विक एआई कार्यबल का केंद्र बनाने के लिए एक राष्ट्रीय एआई टैलेंट मिशन की शुरुआत की सिफारिश करती है। एआई के इस दौर में भारत के 9 मिलियन से अधिक तकनीकी और ग्राहक अनुभव पेशेवरों के लिए यह एक सुनहरा अवसर हो सकता है। आइए, इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं।

एआई का दोहरा प्रभाव: नौकरी हानि और सृजन के बीच संतुलन
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का तकनीकी सेवा क्षेत्र, जो 245 अरब डॉलर का बाजार है, एआई के कारण गहन परिवर्तन से गुजर रहा है। एक ओर, एआई स्वचालन के कारण गुणवत्ता आश्वासन इंजीनियर, प्रथम स्तर के समर्थन एजेंट और अन्य रूटीन कार्यों वाली भूमिकाएं तेजी से अप्रासंगिक हो रही हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2031 तक तकनीकी क्षेत्र के 80 लाख कर्मचारियों में से करीब 20 लाख नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा, “यह केवल 20 लाख नौकरियों की बात नहीं है; ये 20-30 लाख अन्य लोगों के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती हैं, क्योंकि इनकी आय अर्थव्यवस्था में बहाव पैदा करती है और वस्तुओं व सेवाओं की मांग बढ़ाती है।”

हालांकि, रिपोर्ट सकारात्मक पक्ष पर भी जोर देती है। यदि भारत एआई को अपनाने और कौशल विकास पर तुरंत ध्यान दे, तो अगले पांच वर्षों में 40 लाख नई एआई-प्रथम भूमिकाएं सृजित की जा सकती हैं। इनमें नैतिक एआई विशेषज्ञ, एआई ट्रेनर, सेंटिमेंट एनालिस्ट और एआई डेवऑप्स इंजीनियर जैसी उन्नत भूमिकाएं शामिल हैं। सुब्रह्मण्यम ने कहा, “भारत की ताकत उसके लोगों में है। 9 मिलियन से अधिक तकनीकी और ग्राहक अनुभव पेशेवरों के साथ, और दुनिया का सबसे बड़ा युवा डिजिटल प्रतिभा पूल होने के कारण, हमारे पास पैमाना और महत्वाकांक्षा दोनों हैं।” रिपोर्ट का उद्देश्य व्यवधान को अवसर में बदलना है, ताकि भारत 2035 तक वैश्विक एआई प्रतिभा का केंद्र बन सके।

राष्ट्रीय एआई टैलेंट मिशन: सुझाई गई प्रमुख पहलें
व्यवधान को अवसर में बदलने के लिए नीति आयोग ने ‘राष्ट्रीय एआई टैलेंट मिशन’ की शुरुआत की सिफारिश की है। यह एक राष्ट्र-स्तरीय समन्वित प्रयास होगा, जो भारत को एआई कार्यबल का वैश्विक केंद्र बनाने पर केंद्रित होगा। मिशन के तीन मुख्य स्तंभ इस प्रकार हैं:

  1. शिक्षा प्रणाली में एआई एकीकरण: स्कूलों, विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक कार्यक्रमों में एआई साक्षरता को आधारभूत कौशल के रूप में शामिल करना। इससे युवा पीढ़ी को शुरुआत से ही एआई के साथ परिचित कराया जाएगा, ताकि वे भविष्य की मांगों के अनुरूप तैयार हो सकें।
  2. राष्ट्रीय पुनर्कौशल इंजन का निर्माण: लाखों तकनीकी और ग्राहक अनुभव पेशेवरों को उच्च-मूल्य, एआई-संवर्धित भूमिकाओं के लिए अपस्किल और रीस्किल करना। इसमें ऑनलाइन कोर्स, वर्कशॉप और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होंगे, जो वर्तमान कर्मचारियों को नई तकनीकों से जोड़ेंगे।
  3. वैश्विक एआई प्रतिभा आकर्षण: घरेलू प्रतिभा को बनाए रखना, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आकर्षित करना और भारत को प्रीमियर एआई कौशल विकास गंतव्य के रूप में स्थापित करना। इससे विदेशी निवेश और सहयोग बढ़ेगा।

रिपोर्ट जारी करने के दौरान, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और नीति आयोग के विशिष्ट साथी देबजानी घोष ने कहा, “नौकरी हानि और सृजन के बीच का अंतर आज लिए गए फैसलों पर निर्भर करता है। यह रोडमैप भारत को 2035 तक एआई प्रतिभा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए एक स्पष्ट, कार्यान्वयन योग्य मार्ग प्रदान करता है।” यह मिशन न केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित रहेगा, बल्कि अन्य क्षेत्रों जैसे विनिर्माण और कृषि में भी एआई एकीकरण को बढ़ावा देगा।

भारत के लिए व्यापक अवसर: आर्थिक वृद्धि और सामाजिक परिवर्तन
नीति आयोग की यह रिपोर्ट भारत के ‘विकसित भारत 2047’ विजन से जुड़ी हुई है। एआई न केवल नौकरियां सृजित करेगा, बल्कि 2035 तक अर्थव्यवस्था में 1.9 ट्रिलियन डॉलर का योगदान भी दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए 8% वार्षिक वृद्धि दर हासिल करनी होगी, और एआई इसमें केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से, युवा डिजिटल प्रतिभा के विशाल पूल के साथ, भारत एआई-चालित नवाचारों में वैश्विक नेता बन सकता है।

हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बिना त्वरित कार्रवाई के, रूटीन भूमिकाओं का लोप हो सकता है, जो असमानता बढ़ा सकता है। रिपोर्ट अनौपचारिक क्षेत्र के 49 करोड़ श्रमिकों के लिए भी एआई के उपयोग पर एक अलग अध्ययन ‘एआई फॉर इंक्लूसिव सोसाइटल डेवलपमेंट’ का जिक्र करती है, जो डेलॉइट के सहयोग से तैयार किया गया। इसमें ‘मिशन डिजिटल श्रमसेतु’ की सिफारिश की गई है, जो अनौपचारिक श्रमिकों के लिए एआई को सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाने पर केंद्रित है। देबजानी घोष ने कहा, “30 ट्रिलियन डॉलर के ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य को हासिल करने के लिए, हमें 49 करोड़ श्रमिकों को पीछे नहीं छोड़ सकते, जो हमारी अर्थव्यवस्था को गति देते हैं।”

भविष्य की राह: सहयोग और त्वरित कदमों की जरूरत
नीति आयोग का मानना है कि एआई क्रांति को सफल बनाने के लिए सहयोग अनिवार्य है। सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थानों और स्टार्टअप्स को एकजुट होकर काम करना होगा। सुब्रह्मण्यम ने जोर दिया, “यदि हम भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों के जीवन को बदलने के प्रति गंभीर हैं, तो सहयोग वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है।” रिपोर्ट में पांच-सूत्री एआई रणनीति का भी उल्लेख है, जो डेटा प्रबंधन से लेकर नौकरी सृजन तक फैली हुई है।

यह रिपोर्ट न केवल नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक है, बल्कि युवाओं, पेशेवरों और उद्योगों के लिए भी एक कॉल टू एक्शन है। एआई को अपनाकर भारत न केवल रोजगार संकट से निपट सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्व भी कर सकता है। यदि सिफारिशें लागू होती हैं, तो 40 लाख नई नौकरियां न केवल आंकड़े होंगी, बल्कि लाखों परिवारों के लिए समृद्धि का स्रोत बनेंगी। नीति आयोग की यह पहल भारत को एआई युग में आगे ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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