Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

आज की तेजी से विकसित हो रही तकनीकी दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने मानव जीवन को कई सुविधाएं प्रदान की हैं, लेकिन इसका दुरुपयोग भी उतना ही खतरनाक साबित हो रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में एआई के माध्यम से तैयार की जा रही अश्लील तस्वीरें और वीडियो की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो विशेष रूप से युवाओं और नाबालिगों के जीवन को बर्बाद कर रही हैं। डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी कंटेंट बनाना अब एक सामान्य समस्या बन चुका है, जो समाज में नैतिक पतन और मानसिक आघात का कारण बन रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2025 में साइबर से जुड़ी अश्लीलता के करीब 200 मामले सामने आए हैं, जिनमें से कई में एआई का उपयोग संदिग्ध है। ये आंकड़े न केवल वर्तमान की स्थिति दर्शाते हैं, बल्कि भविष्य में और अधिक सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। इस लेख में हम छत्तीसगढ़ में हुई कुछ प्रमुख घटनाओं, आंकड़ों और उनके प्रभावों पर चर्चा करेंगे, साथ ही समाधान के उपायों पर भी विचार करेंगे।

छत्तीसगढ़ में बढ़ती एआई-जनित अश्लीलता की समस्या
छत्तीसगढ़ जैसे विकासशील राज्य में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि हो रही है। एआई टूल्स, जो मूल रूप से रचनात्मक कार्यों के लिए विकसित किए गए थे, अब अपराधियों के हाथों में एक हथियार बन चुके हैं। इन टूल्स से आसानी से किसी व्यक्ति की तस्वीर को बदलकर अश्लील सामग्री तैयार की जा सकती है, जो सोशल मीडिया पर वायरल होकर पीड़ितों की प्रतिष्ठा को धूमिल कर देती है। राज्य पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में अधिकतर पीड़ित महिलाएं और नाबालिग लड़कियां होती हैं, जिन्हें ब्लैकमेलिंग या बदनामी का शिकार बनाया जाता है। वर्ष 2025 में दर्ज हुए मामलों से स्पष्ट है कि एआई का दुरुपयोग अब ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, जहां जागरूकता की कमी इसे और घातक बनाती है। ये घटनाएं न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती हैं, बल्कि परिवारों और समुदायों में तनाव पैदा करती हैं। सरकार और पुलिस को ऐसे अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण और संसाधनों की जरूरत है, ताकि जांच प्रक्रिया तेज हो सके।

प्रमुख घटनाएं: एआई के दुरुपयोग के जीवंत उदाहरण
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो एआई की दोधारी तलवार की प्रकृति को उजागर करती हैं। उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2025 में नया रायपुर स्थित ट्रिपल आईटी संस्थान में एक छात्र ने एआई सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर 30 से 36 महिला छात्राओं की हजारों अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार किए। इस मामले में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया गया और संस्थान से निष्कासित कर दिया गया। यह घटना शिक्षा जगत में तकनीकी दुरुपयोग की गंभीरता को दर्शाती है, जहां छात्र-छात्राएं एक-दूसरे की गोपनीयता का सम्मान नहीं कर रहे।

एक अन्य चौंकाने वाला मामला दिसंबर 2025 में कोरबा जिले के बनबंधा गांव से सामने आया। यहां 25 वर्षीय रतिराम यादव नामक व्यक्ति ने एक नाबालिग लड़की की एआई से तैयार की गई अश्लील सामग्री बनाई और उसे व्हाट्सएप ग्रुप में फैला दिया। पीड़िता के परिवार ने 5 दिसंबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से लड़की को तंग कर रहा था और एआई का उपयोग कर ब्लैकमेल करने की कोशिश की। जब पीड़िता ने इनकार किया, तो आरोपी ने गुस्से में कंटेंट को सार्वजनिक कर दिया। अब परिवार को धमकियां मिल रही हैं, और आरोपी पुलिस तथा साइबर सेल से संपर्क होने का दावा कर रहा है। इस मामले की जांच कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी को सौंपी गई है, लेकिन प्रगति न होने से पीड़ित पक्ष पुलिस अधीक्षक से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहा है।

सक्ति जिले में भी हाल ही में एक चॉइस सेंटर संचालक के खिलाफ कार्रवाई हुई, जहां उसने एक युवती की फर्जी एआई-निर्मित तस्वीर बनाकर ग्रुप में साझा की। इस घटना में अपराध दर्ज किया गया है, जो दर्शाता है कि छोटे-छोटे व्यावसायिक केंद्र भी ऐसे अपराधों का माध्यम बन सकते हैं। ये मामले साबित करते हैं कि एआई तकनीक का पहुंच आसान होने से अपराधी बेखौफ हो गए हैं।

आंकड़े: एक चेतावनीपूर्ण तस्वीर
एनसीआरबी के 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में साइबर अश्लीलता से संबंधित लगभग 200 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें ऑनलाइन अश्लील सामग्री, एआई-जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक जैसे तत्व प्रमुख हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या और बढ़ने की आशंका है, जो डिजिटल दुनिया के बढ़ते जोखिमों की ओर इशारा करती है। विशेष रूप से नाबालिगों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे तकनीकी रूप से कम जागरूक होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अपराधों में सख्त कानूनी कार्रवाई, जैसे आईटी एक्ट की धाराओं के तहत दंड, और सामाजिक जागरूकता अभियान आवश्यक हैं। कोरबा पुलिस ने बताया कि जांच चल रही है और आरोपी को जल्द पकड़ा जाएगा, लेकिन देरी से पीड़ितों का विश्वास कम हो रहा है।

परिवारों की पीड़ा और सामाजिक प्रभाव
ऐसी घटनाओं में पीड़ित परिवार सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। बनबंधा मामले में पीड़िता के परिजन चिंतित हैं, क्योंकि आरोपी की गिरफ्तारी न होने से उनकी सुरक्षा खतरे में है। वे आरोप लगाते हैं कि आरोपी पुलिस से जुड़े होने का दावा कर धमका रहा है। यह स्थिति न केवल मानसिक तनाव पैदा करती है, बल्कि समाज में विश्वास की कमी भी लाती है। डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए परिवारों को अपने बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में शिक्षित करना चाहिए, जैसे संदिग्ध लिंक न खोलना या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना।

समाधान: जागरूकता और सहायता
ऐसे मामलों से बचाव के लिए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। अभिभावकों से अपील है कि वे बच्चों को इंटरनेट के सकारात्मक उपयोग के साथ-साथ इसके खतरों के बारे में बताएं। सरकार को एआई टूल्स पर नियंत्रण बढ़ाना चाहिए, जैसे उपयोगकर्ता सत्यापन और सामग्री फिल्टरिंग। यदि हम सामूहिक रूप से प्रयास करें, तो एआई को अभिशाप से वरदान में बदला जा सकता है। कुल मिलाकर, ये घटनाएं हमें सतर्क रहने की याद दिलाती हैं कि तकनीक का उपयोग नैतिकता के साथ हो, अन्यथा यह समाज को विघटित कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp