By: Ravindra Sikarwar
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में रविवार को हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। बॉन्डी बीच इलाके में चल रहे एक सार्वजनिक उत्सव के दौरान अचानक हुई अंधाधुंध फायरिंग से अफरा-तफरी मच गई। हमले में 16 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इसी भयावह माहौल के बीच एक ऐसा नाम सामने आया, जिसकी बहादुरी और इंसानियत की हर ओर चर्चा हो रही है—44 वर्षीय अहमद अल अहमद।
घटना के समय बॉन्डी बीच पर बड़ी संख्या में लोग जश्न मना रहे थे। तभी दो आतंकियों ने भीड़ को निशाना बनाते हुए गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, चीख-पुकार मच गई। इसी दौरान अहमद अल अहमद ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी आम तौर पर कोई निहत्था व्यक्ति नहीं करता। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकियों से सीधे मुकाबला करने का फैसला लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अहमद अपने कजिन भाई जोजाय अलकंज के साथ वहां मौजूद थे। जब गोलियों की आवाज सुनाई दी तो दोनों पास खड़ी एक कार के पीछे छिप गए। चारों ओर डर का माहौल था, लेकिन अहमद ने स्थिति को समझते हुए आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। जैसे ही उन्हें मौका मिला, वह अचानक कार के पीछे से निकले और फायरिंग कर रहे एक आतंकी पर झपट पड़े।
अहमद की इस साहसिक कार्रवाई से आतंकी पूरी तरह हतप्रभ रह गया। एक ही झटके में अहमद ने उसके हाथ से बंदूक छीन ली। हालांकि, उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण नहीं था, लेकिन उन्होंने बंदूक को आतंकी की ओर तानकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कई लोगों को वहां से सुरक्षित निकलने का मौका मिल गया।
इस बहादुरी की कीमत अहमद को खुद चुकानी पड़ी। जब वह लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें दो गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल वह अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है।
अहमद के भाई जोजाय ने बाद में बताया कि जब अहमद आतंकियों से भिड़ने के लिए आगे बढ़े, तो उन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। इस पर अहमद ने बेहद भावुक शब्दों में कहा था कि अगर उन्हें कुछ हो जाए तो घरवालों से कहना कि वह लोगों की जान बचाते हुए मरे। ये शब्द अब उनकी बहादुरी की पहचान बन चुके हैं।
हमले के बाद सोशल मीडिया पर अहमद को लेकर कई तरह की जानकारियां वायरल होने लगीं। कुछ लोगों ने उन्हें फल विक्रेता बताया, तो कुछ ने उनके रहने के स्थान को लेकर गलत दावे किए। बाद में स्पष्ट हुआ कि अहमद एक तंबाकू और स्पेशलिटी स्टोर के मालिक हैं, जिसे वह वर्ष 2021 से चला रहे हैं। गलत पहचान इसलिए भी फैली क्योंकि हमले के बाद ऑस्ट्रेलियाई समाज उनके प्रति आभार जताने के तरीके तलाश रहा था।
अहमद अल अहमद मूल रूप से सीरिया के रहने वाले हैं। वहां चल रहे गृहयुद्ध के कारण उन्हें वर्ष 2006 में अपना देश छोड़कर ऑस्ट्रेलिया आना पड़ा। सिडनी में उन्होंने मेहनत से अपनी जिंदगी दोबारा बसाई। वह दो बेटियों के पिता हैं और एक सामान्य नागरिक की तरह शांत जीवन जी रहे थे। लेकिन संकट की घड़ी में उन्होंने असाधारण साहस दिखाकर यह साबित कर दिया कि नायक बनने के लिए किसी खास पद या वर्दी की जरूरत नहीं होती।
आज अहमद अल अहमद को ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में इंसानियत और बहादुरी की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि जब हालात सबसे भयावह हों, तब भी एक आम इंसान का साहस कई जिंदगियों को बचा सकता है।
