by-Ravindra Sikarwar
भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी आंदोलन’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों के ईमेल खातों को राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) से हटाकर चेन्नई स्थित जोहो कॉर्पोरेशन के स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने के बाद अब कई राज्य सरकारें भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह परिवर्तन न केवल डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि विदेशी तकनीकी निर्भरता को कम करके भारतीय नवाचार को बढ़ावा देगा। 25 अक्टूबर 2025 को एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न राज्य सरकारें अपने आधिकारिक ईमेल सिस्टम को जोहो मेल पर माइग्रेट करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी हैं, जो केंद्र के इस कदम का सीधा अनुसरण है।
पृष्ठभूमि: केंद्र सरकार का जोहो मेल पर पूर्ण संक्रमण
केंद्र सरकार ने पिछले एक वर्ष में लगभग 12 लाख ईमेल खातों—जिनमें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के कर्मचारी भी शामिल हैं—को एनआईसी आधारित सिस्टम से जोहो के क्लाउड प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया है। यह बदलाव 2023 में डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन द्वारा जारी टेंडर के माध्यम से हुआ, जिसमें भारतीय कंपनियों को सरकारी ईमेल सेवाओं के होस्टिंग और प्रबंधन का अवसर दिया गया। जोहो को इस अनुबंध के लिए चुना गया, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर एंटरप्राइज ईमेल होस्टिंग को सुरक्षित रूप से संभालने की क्षमता रखता है और गोपनीयता के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाता है।
यह सात वर्षीय अनुबंध के तहत किया गया, जिसमें डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग को एनआईसी से हटाकर जोहो पर ले जाया गया, लेकिन आधिकारिक .nic.in और .gov.in डोमेन को अपरिवर्तित रखा गया। शिक्षा मंत्रालय ने 3 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी कर अधिकारियों को जोहो ऑफिस सूट (जिसमें ईमेल, डॉक्यूमेंट्स, स्प्रेडशीट्स और प्रेजेंटेशन शामिल हैं) का उपयोग करने का निर्देश दिया। मंत्रालय ने इसे ‘स्वदेशी आंदोलन के तहत डिजिटल संप्रभुता मजबूत करने’ का हिस्सा बताया, जो भारत को सेवा अर्थव्यवस्था से उत्पाद-आधारित राष्ट्र में बदलने की दिशा में एक साहसिक कदम है।
इस संक्रमण को तेज करने का एक प्रमुख कारण 2022 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) दिल्ली पर साइबर हमला था, जिसने ओपन-सोर्स टूल्स की सुरक्षा जोखिमों को उजागर कर दिया। इसके बाद सरकार ने स्वदेशी विकल्पों की तलाश तेज कर दी, ताकि डेटा लीक और विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता से बचा जा सके। जोहो का प्लेटफॉर्म पहले से ही एनआईसी मेल सिस्टम में एकीकृत था, लेकिन अब इसे प्रमुखता से अपनाया जा रहा है।
प्रमुख नेताओं का जोहो मेल पर स्विच: प्रेरणा का स्रोत
केंद्र सरकार के इस कदम को मजबूत करने के लिए कई उच्च पदस्थ नेता व्यक्तिगत रूप से जोहो मेल पर शिफ्ट हो चुके हैं, जो पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
- गृह मंत्री अमित शाह: 8 अक्टूबर 2025 को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्होंने अपना नया ईमेल पता amitshah.bjp@zohomail.in साझा किया और लोगों से रिकॉर्ड अपडेट करने का अनुरोध किया। उन्होंने इसे ‘ट्रंप-शैली’ में साइन-ऑफ करते हुए समाप्त किया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। शाह ने कहा कि यह बदलाव स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का हिस्सा है।
- आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव: सितंबर 2025 में उन्होंने जोहो के ऑफिस टूल्स पर स्विच करने की घोषणा की और देशवासियों से स्वदेशी अपनाने का आग्रह किया।
- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान: 9 अक्टूबर 2025 को उन्होंने आधिकारिक रूप से जोहो मेल जॉइन किया।
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी: वह भी इस सूची में शामिल हैं, जिन्होंने राज्य स्तर पर इस पहल को बढ़ावा दिया।
जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने शाह के स्विच को ‘भारतीय तकनीकी पारिस्थितिकी के लिए गौरवपूर्ण क्षण’ बताते हुए इसे समर्पित किया अपने इंजीनियरों को, जो 20 वर्षों से भारत में ही काम कर रहे हैं।
राज्य सरकारों का प्रवेश: कौन-कौन शामिल?
केंद्र के इस सफल मॉडल से प्रेरित होकर, कई राज्य सरकारें अब अपने ईमेल इंफ्रास्ट्रक्चर को जोहो मेल पर स्थानांतरित करने की योजना बना रही हैं। हालांकि विशिष्ट राज्यों की पूरी सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार तमिलनाडु (जोहो का गृह राज्य), उत्तराखंड (मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में), और अन्य प्रमुख राज्य जैसे गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक इस दिशा में सक्रिय हैं। ये राज्य केंद्र की ‘डिजिटल स्वदेशी’ नीति को अपनाते हुए अपने कर्मचारियों के ईमेल सिस्टम को अपग्रेड करने की प्रक्रिया में हैं।
उत्तराखंड पहले ही एक कदम आगे बढ़ चुका है, जहां सीएम धामी के स्विच के बाद राज्य प्रशासन ने जोहो को आधिकारिक प्लेटफॉर्म के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से हो रही है, ताकि संक्रमण सुचारू रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य स्तर पर डेटा सुरक्षा बढ़ेगी और स्थानीय आईटी कंपनियों को नया बाजार मिलेगा।
जोहो मेल: स्वदेशी प्लेटफॉर्म की विशेषताएं और सुरक्षा
जोहो मेल, जोहो कॉर्पोरेशन का प्रमुख उत्पाद है, एक क्लाउड-आधारित ईमेल सेवा है जो गूगल के जीमेल या माइक्रोसॉफ्ट के आउटलुक जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म्स का स्वदेशी विकल्प है। यह तेनकासी, तमिलनाडु में स्थित कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और वैश्विक स्तर पर 80 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करता है। प्रमुख विशेषताएं:
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, भारतीय डेटा सेंटर्स पर स्टोरेज, और नियमित ऑडिट।
- एकीकरण: जोहो वर्कप्लेस सूट के साथ एकीकृत, जिसमें दस्तावेज संपादन, कैलेंडर, और सहयोग टूल्स शामिल हैं।
- स्केलेबिलिटी: बड़े संगठनों के लिए उपयुक्त, जैसे सरकारी विभाग।
- अनुपालन: जीडीपीआर, आईएसओ 27001, और भारतीय डेटा संरक्षण कानूनों का पालन।
सरकार ने जोहो की प्रणाली की जांच कई एजेंसियों से कराई, जिनमें एनआईसी, सर्ट-इन (कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया), और सॉफ्टवेयर क्वालिटी सिस्टम्स (एसक्यूएस) शामिल हैं। ये एजेंसियां प्लेटफॉर्म की नियमित ऑडिटिंग करती रहती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जोहो के सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं और विदेशी टूल्स की तुलना में कम जोखिम वाले हैं।
व्यापक प्रभाव: डिजिटल संप्रभुता और आर्थिक लाभ
यह बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ्स के जवाब में ‘आत्मनिर्भर’ डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने का हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाना और स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देना है। उद्योग पर्यवेक्षकों के अनुसार, जोहो जैसे प्लेटफॉर्म्स का अपनाना निजी क्षेत्र को भी प्रेरित करेगा, जिससे आईटी निर्यात बढ़ेगा और रोजगार सृजन होगा।
जोहो का ‘अरत्तई’ मैसेजिंग ऐप, जो व्हाट्सऐप का स्वदेशी विकल्प है, भी इसी दिशा में एक कदम है। यह कदम भारत को ‘उत्पाद राष्ट्र’ बनाने की आकांक्षा को साकार करेगा, जहां डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और स्वावलंबन प्राथमिकता होंगे। हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे उपयोगकर्ताओं को नए प्लेटफॉर्म से परिचित कराना और साइबर खतरों से निपटना।
स्वदेशी की नई सुबह:
केंद्र के बाद राज्यों का जोहो मेल पर शिफ्ट डिजिटल भारत की यात्रा में एक मील का पत्थर है। यह न केवल तकनीकी स्वावलंबन को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के ‘हर घर स्वदेशी’ अभियान के तहत यह कदम लाखों नागरिकों के लिए प्रेरणा बनेगा, ताकि हम एक सुरक्षित, स्वदेशी-केंद्रित डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ सकें।
