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BY: ARVIND CHOUHAN (EDITOR)

भोपाल: मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए बार-बार इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की जाती है। हर बार उद्योगपति गौतम अडानी राज्य में बड़े निवेश की घोषणाएं करते हैं, लेकिन अभी तक कोई भी परियोजना पूरी तरह से जमीनी स्तर पर नहीं उतरी।

अडानी समूह ने अब तक चार बार निवेश की घोषणा की, लेकिन हकीकत में एक भी परियोजना लागू नहीं हुई।


अडानी समूह की घोषणाएं और हकीकत

पहली घोषणा: जनवरी 2023 – ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, इंदौर

  • पावर जनरेशन, ट्रांसमिशन, ऑयल प्रोसेसिंग, गैस, सीमेंट, सड़क और डिफेंस क्षेत्रों में निवेश का वादा किया गया।
  • नतीजा: कोई ठोस प्रोजेक्ट जमीन पर नहीं आया, न ही कोई रिपोर्ट जारी हुई।
  • 80,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया गया।
  • दूसरी घोषणा: मार्च 2024 – इन्वेस्ट मध्यप्रदेश सम्मेलन, उज्जैन
  • 75,000 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया गया।
  • उज्जैन-इंदौर-भोपाल महाकाल एक्सप्रेसवे के लिए 5,000 करोड़ रुपये निवेश का ऐलान हुआ।
  • थर्मल पावर, नवीकरणीय ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण में निवेश की बात हुई।
  • नतीजा: कोई नई परियोजना शुरू नहीं हुई, सिर्फ घोषणाएं रहीं।

तीसरी घोषणा: फरवरी 2025 – ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, भोपाल

  • 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान हुआ।
  • ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, नया एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और कोयला-गैसीकरण परियोजनाएं घोषित की गईं।
  • 1.2 लाख नौकरियों का दावा किया गया।
  • नतीजा: पुराने वादों की पुनरावृत्ति, कोई ठोस प्रगति नहीं।
  • चौथी घोषणा: 2026 में संभावित इन्वेस्टर्स समिट
  • अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन संभावना है कि फिर से बड़े निवेश का दावा किया जाएगा।
  • नतीजा: यदि पिछली घोषणाओं का हश्र देखें, तो इस बार भी वादा हवा में ही रहने की आशंका है।

असली सवाल: निवेश केवल घोषणाओं तक सीमित क्यों?

अडानी समूह ने अब तक 4 बार बड़े निवेश का ऐलान किया, लेकिन कोई नया प्रोजेक्ट बड़े स्तर पर शुरू नहीं हुआ।
सरकार की ओर से भी इन वादों की सच्चाई को लेकर कोई ठोस रिपोर्ट जारी नहीं की गई।
रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन आंकड़े सामने नहीं आए।
क्या सरकार अडानी समूह से पूछेगी कि पहले किए गए वादों का क्या हुआ?

मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए निवेश की घोषणाओं के बजाय, पुराने वादों को पूरा करने पर ध्यान दिया जाए। अन्यथा, ये इन्वेस्टर्स समिट सिर्फ एक प्रचार माध्यम बनकर रह जाएंगी।