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by-Ravindra Sikarwar

सुप्रीम कोर्ट ने रेनूकास्वामी हत्याकांड में कन्नड़ अभिनेता दर्शन और छह अन्य सह-आरोपियों को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। यह फैसला कर्नाटक सरकार की अपील पर सुनाया गया, जिसमें उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को “गंभीर त्रुटियों” और “यांत्रिक प्रक्रिया” से ग्रस्त बताया। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने मुकदमे से पहले ही सबूतों की जांच शुरू कर दी थी, जो कि केवल निचली अदालत का काम है।

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि “कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।” अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि दर्शन को जेल में किसी भी तरह का विशेष या VIP उपचार दिया जाता है, तो जेल अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों को तुरंत हिरासत में लेने का आदेश दिया है और निचली अदालत को मामले की सुनवाई तेजी से करने का निर्देश दिया है।

रेनूकास्वामी हत्याकांड:
यह मामला 33 वर्षीय रेनूकास्वामी की हत्या से जुड़ा है। रेनूकास्वामी, जो दर्शन का एक प्रशंसक था, पर आरोप है कि उसने अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा को आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। पुलिस के अनुसार, जून 2024 में रेनूकास्वामी का अपहरण कर उसे बेंगलुरु के एक शेड में ले जाया गया, जहां उसे यातना दी गई। तीन दिनों की यातना के बाद उसकी मौत हो गई और उसके शव को एक नाले में फेंक दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने दर्शन, पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

उच्च न्यायालय का फैसला:
दिसंबर 2024 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दर्शन सहित सात आरोपियों को नियमित जमानत दे दी थी, जबकि निचली अदालत ने इसे पहले ही खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय के इस फैसले को कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद यह नया फैसला आया है।

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