By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते को एक नया और भावुक अध्याय मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनकी भारत यात्रा के दौरान एक विशेष उपहार भेंट किया – चांदी के खूबसूरत आवरण में जड़ी हुई श्रीमद्भगवद्गीता की प्राचीन पांडुलिपि शैली वाली प्रतिलिपि। यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच 22वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता के दौरान हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देने पर जोर दिया गया।
यह उपहार कोई साधारण किताब नहीं था। इसे हस्तकला विशेषज्ञों ने हस्तल्दी-केसर से रंगे विशेष कागज पर लिखा था, जिसके कवर पर शुद्ध चांदी की नक्काशी की गई थी। गीता के पहले और अंतिम पृष्ठ पर संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ रूसी भाषा में भी अनुवाद छपा था, ताकि राष्ट्रपति पुतिन इसे आसानी से समझ सकें। साथ ही एक छोटा सा चांदी का मोरपंख भी रखा गया था, जो भगवान श्रीकृष्ण का प्रतीक माना जाता है।
जब प्रधानमंत्री मोदी ने यह तोहफा पुतिन को सौंपा तो रूसी राष्ट्रपति की आँखों में चमक साफ दिखी। पुतिन ने गीता को हाथ में लेकर कहा, “यह मेरे लिए बहुत कीमती उपहार है। मैंने पहले भी गीता के बारे में बहुत कुछ पढ़ा और सुना है, लेकिन इसे इतने सुंदर रूप में प्राप्त करना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह किताब मुझे जीवन के सही-गलत के बीच निर्णय लेने में हमेशा प्रेरित करेगी।” उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा, “अब मैं इसे अपने कार्यालय में रखूँगा ताकि मुश्किल फैसलों से पहले एक नजर इस पर डाल सकूँ।”
यह पहला मौका नहीं है जब पुतिन ने गीता के प्रति अपना लगाव जाहिर किया हो। साल 2018 में भी उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि भगवद्गीता उन्हें बहुत प्रभावित करती है और वे इसे नियमित रूप से पढ़ते हैं। रूसी राष्ट्रपत्रिका ‘रूस बियोंड’ के अनुसार, पुतिन के निजी पुस्तकालय में गीता की कई प्रतियाँ मौजूद हैं, जिनमें से एक स्वामी प्रभुपाद द्वारा अनुवादित संस्करण भी शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने उपहार देते समय कहा, “रूस और भारत के बीच सिर्फ रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव भी है। भगवद्गीता कर्म, धर्म और जीवन के सत्य को बताती है। मुझे विश्वास है कि यह आपको उतनी ही शांति और प्रेरणा देगी जितनी हमें सदियों से देती आई है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैसे महाभारत काल से ही भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रमाण मिलते हैं – जैसे कि रूसी लोककथाओं में इंद्र और कई भारतीय देवताओं के नामों का मिलना।
इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु सहयोग और व्यापार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इसी उपहार की हुई। सोशल मीडिया पर #ModiGiftsGita ट्रेंड करने लगा और लाखों लोगों ने इसे दोनों देशों की गहरी मित्रता का प्रतीक बताया। कई लोगों ने लिखा कि जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में दो बड़े नेता एक-दूसरे को आध्यात्मिक उपहार दे रहे हैं, यह अपने आप में एक बड़ा संदेश है।
रूसी मीडिया ने भी इस घटना को प्रमुखता से दिखाया। ‘तास’ न्यूज एजेंसी ने लिखा, “पुतिन के लिए यह उपहार सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन बुद्धिमत्ता का खजाना है।” वहीं ‘इज्वेस्टिया’ अखबार ने शीर्षक लगाया – “मोदी ने पुतिन को सौंपा जीवन का दर्शन।”
इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े अनोखे उपहार दिए हैं – जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन को काश्मीरी पश्मीना शॉल, जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को बौद्ध मूर्ति और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को कांजीवरम साड़ी। लेकिन पुतिन को गीता भेंट करना शायद सबसे व्यक्तिगत और भावनात्मक उपहार रहा।
यह मुलाकात एक बार फिर साबित करती है कि भारत-रूस संबंध सिर्फ तेल, हथियार या व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच एक गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव है जो समय की हर परीक्षा में खरा उतरा है। और इस चांदी-जड़ित गीता ने उस जुड़ाव को एक नया और अमर अध्याय दे दिया।
