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By: Ravindra Sikarwar

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में आस्था और भक्ति से जुड़ा एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। रामलला के दरबार के लिए एक अत्यंत भव्य, कलात्मक और बहुमूल्य प्रतिमा अयोध्या पहुंची है, जिसे एक गुमनाम भक्त ने दान स्वरूप अर्पित किया है। इस प्रतिमा की अनुमानित कीमत 25 से 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है। खास बात यह है कि दानकर्ता ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की है, जिससे यह भेंट श्रद्धा और समर्पण की अनूठी मिसाल बन गई है।

दक्षिण भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण
यह प्रतिमा कर्नाटक शैली में तैयार की गई है, जो दक्षिण भारत की पारंपरिक मूर्तिकला का प्रतिनिधित्व करती है। प्रतिमा में सोने जैसी चमक के साथ चांदी, हीरा, पन्ना और अन्य बहुमूल्य रत्नों का उपयोग किया गया है। इसकी बनावट न केवल भव्य है, बल्कि इसमें बारीक कारीगरी और सूक्ष्म कलात्मकता भी साफ झलकती है। शिल्पकारों ने प्रतिमा के हर हिस्से को अत्यंत सावधानी और श्रद्धा के साथ गढ़ा है।

आकार और वजन ने बढ़ाया आकर्षण
प्रतिमा का आकार इसे और भी विशेष बनाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 10 फीट और चौड़ाई करीब 8 फीट बताई जा रही है। अभी इसका आधिकारिक वजन नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान है कि इसका वजन लगभग 5 क्विंटल के आसपास हो सकता है। इतने विशाल आकार और भारी वजन के बावजूद प्रतिमा की संतुलित बनावट कारीगरों की दक्षता को दर्शाती है।

कर्नाटक से अयोध्या तक का विशेष सफर
करीब 1,750 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर यह प्रतिमा कर्नाटक से अयोध्या लाई गई। इसके लिए एक विशेष रूप से तैयार वैन का उपयोग किया गया, ताकि प्रतिमा को किसी भी तरह की क्षति न पहुंचे। इस यात्रा में लगभग 5 से 6 दिन का समय लगा। मंगलवार शाम करीब 3:30 बजे प्रतिमा राम मंदिर परिसर पहुंची, जहां इसे सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।

गुमनाम दानदाता बना चर्चा का विषय
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रतिमा किस श्रद्धालु या किस समूह द्वारा भेजी गई है। सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक के कुछ भक्तों ने मिलकर इस प्रतिमा का निर्माण कराया है, लेकिन उन्होंने जानबूझकर अपनी पहचान उजागर नहीं की। ट्रस्ट ने इस दान को निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक बताया है।

अंगद टीला पर स्थापना पर विचार
प्रतिमा को मंदिर परिसर के निकट संत तुलसीदास मंदिर के पास स्थित अंगद टीला पर स्थापित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद लिया जाएगा। स्थापना के बाद प्रतिमा का भव्य अनावरण किया जाएगा, जिसके साथ प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होने की संभावना है।

देशभर के संतों को मिलेगा आमंत्रण
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। इस अवसर पर देशभर के संतों, महंतों और धर्माचार्यों को आमंत्रित किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह आयोजन राममंदिर से जुड़े धार्मिक आयोजनों में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ेगा।

कारीगरों की मेहनत और आस्था का संगम
इस प्रतिमा के निर्माण में दक्षिण भारत के अनुभवी और कुशल कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उच्च गुणवत्ता वाली धातुओं और रत्नों के प्रयोग से प्रतिमा को न केवल आकर्षक बनाया गया है, बल्कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने की दृष्टि से भी तैयार किया गया है। इसकी सजावट और संरचना में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक साफ दिखाई देती है।

श्रद्धा का मौन संदेश
यह दान केवल एक बहुमूल्य प्रतिमा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। बिना नाम और पहचान के इतना बड़ा दान कर देना इस बात को दर्शाता है कि श्रद्धा में प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं की गहराई मायने रखती है।

राममंदिर को प्राप्त यह भव्य प्रतिमा आने वाले समय में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। यह न केवल मंदिर की शोभा बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय शिल्पकला, धार्मिक आस्था और निस्वार्थ भक्ति का जीवंत उदाहरण भी बनेगी। गुमनाम भक्त द्वारा दिया गया यह उपहार रामभक्ति की अमर कहानी के रूप में याद किया जाएगा।

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