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By: Ravindra Sikarwar

UP news: बुलंदशहर जिले में एक बेहद ही दर्दनाक और मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली मात्र छह वर्षीय एक नन्ही बच्ची के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और फिर उसे इमारत की छत से नीचे फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। बच्ची के परिवार वालों का आरोप है कि आरोपी युवकों ने पहले उसकी अस्मत लूटी और फिर सबूत मिटाने के इरादे से उसे छत से धक्का दे दिया।

यह हृदयविदारक घटना 2 जनवरी 2026 की शाम की है। बच्ची अपने घर की छत पर अकेले खेल रही थी। उसी बहुमंजिला इमारत में किराए पर रहने वाले दो युवक, जिनके नाम राजू और वीरू बताए जा रहे हैं, ने मौका देखकर इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया। राजू मूल रूप से बलरामपुर जिले का रहने वाला है, जबकि वीरू लखीमपुर खीरी का निवासी है। दोनों आरोपी पीड़िता के परिवार के साथ ही उसी बिल्डिंग में किराए के मकान में रहते थे। बच्ची के खेलते-खेलते अचानक गायब हो जाने पर परिवार वालों ने उसे चारों तरफ तलाश किया। कुछ देर बाद वह घर के पीछे स्थित एक खाली प्लॉट में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बच्ची के पिता ने तुरंत सिकंदराबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से उन दो किराएदार युवकों पर शक जताया, जो उसी इमारत में रहते थे। पिता का कहना था कि उनकी बेटी छत पर खेल रही थी और अचानक लापता हो गई। बाद में जब वह घायल हालत में मिली तो परिवार को दुष्कर्म की आशंका हुई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। बुलंदशहर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) डॉ. तेजवीर सिंह ने बताया कि आरोपी युवकों पर दुष्कर्म और हत्या का संदेह था, इसलिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने इलाके में छापेमारी शुरू की और मुखबिरों की सूचना पर आरोपियों का पता लगाया।

मुखबिर से मिली खबर के अनुसार दोनों आरोपी कंवारा रोड के पास एक जगह छिपे हुए थे। पुलिस टीम ने जब उन्हें घेरने की कोशिश की तो आरोपियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें दोनों के पैरों में गोली लगी। घायल अवस्था में राजू और वीरू को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस की इस कार्रवाई से दोनों आरोपी लंगड़े हो गए। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से दो अवैध पिस्तौलें, जिंदा कारतूस और खाली खोखे बरामद हुए। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि बच्ची के शोर मचाने या घटना बताने के डर से उन्होंने उसे छत से नीचे फेंक दिया।

पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि होने की उम्मीद है। रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर में पोक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं को जोड़ा जाएगा। एसपी डॉ. तेजवीर सिंह ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और दोषियों को किसी भी कीमत पर सख्त सजा दिलाई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर किराएदारों के साथ रहने वाले परिवारों को अब और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत महसूस हो रही है।

यह वारदात उत्तर प्रदेश में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की कड़ी को और मजबूत करती है। समाज में ऐसी घटनाएं न केवल परिवारों को तोड़ती हैं बल्कि पूरे समुदाय में डर और गुस्से का माहौल पैदा करती हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे दरिंदों को फांसी जैसी कड़ी सजा दी जाए ताकि दूसरों के लिए सबक बने। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन मूल समस्या अपराध की जड़ों को खत्म करने की है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, पड़ोसियों की निगरानी और सख्त कानूनों का पालन ही ऐसी घटनाओं को रोक सकता है।

इस बीच, पीड़ित परिवार सदमे में है। बच्ची की मां रो-रोकर बेहाल है और न्याय की गुहार लगा रही है। इलाके में लोग शोक में डूबे हैं और आरोपी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। उम्मीद है कि न्याय व्यवस्था जल्द से जल्द अपना काम करेगी और ऐसे हैवानों को समाज से बाहर कर देगी।

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