By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: मध्य प्रदेश की जेलें अब पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर रही हैं। राज्य की 133 जेलों में अगले कुछ महीनों में 500 अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) यूनिट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे विचाराधीन कैदियों और खतरनाक अपराधियों की अदालती पेशी अब पुलिस एस्कॉर्ट, लंबे काफिले और भारी-भरकम सुरक्षा इंतजाम के बिना हो सकेगी। इस कदम से न केवल हर साल करोड़ों रुपये की बचत होगी, बल्कि पुलिस बल पर से बोझ भी कम होगा और सबसे बड़ी बात, कैदियों के भागने या हमले की आशंका लगभग शून्य हो जाएगी।
पुरानी व्यवस्था की बड़ी चुनौतियाँ
अभी तक प्रदेश में 42,000 से ज्यादा विचाराधीन बंदियों को अदालतों में पेश करने के लिए रोजाना सैकड़ों पुलिसकर्मी, वाहन और भारी सुरक्षा घेरा लगाना पड़ता था। कई बार एक ही दिन में एक अदालत में 50-60 कैदियों की पेशी होती थी, जिससे पुलिस की गाड़ियाँ कम पड़ जाती थीं। नक्सली, सिमी, PFI, HUJI जैसे खतरनाक संगठनों से जुड़े अपराधियों को तो अलग-अलग राज्यों की अदालतों में ले जाना अपने आप में जोखिम भरा ऑपरेशन होता था। देरी, रास्ते में हमले का डर, ईंधन-वाहन का खर्च और पुलिस बल की अन्य ड्यूटी प्रभावित होना, ये समस्याएँ वर्षों से चली आ रही थीं।
अब हर कोने तक पहुँचेगी VC सुविधा
वर्तमान में प्रदेश की जेलों में 325 VC यूनिट कार्यरत हैं। नए 500 यूनिट जुड़ने के बाद यह संख्या 825 के पार पहुँच जाएगी। इससे प्रदेश की लगभग 1700 अदालतों के साथ सीधी, त्वरित और सुरक्षित कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी। हर जेल में अब इतने यूनिट होंगे कि एक ही दिन में दर्जनों पेशियाँ एक साथ, बिना किसी रुकावट के हो सकेंगी।
भोपाल सेंट्रल जेल इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहाँ पहले सिर्फ 13 VC यूनिट थे, अब 24 नए यूनिट जोड़े जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 37 हो जाएगी। केवल भोपाल सेंट्रल जेल के लिए ही 33 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं और आठ यूनिट तो पहले ही चालू हो चुके हैं।
बंदी खुद बना रहे हैं अपने VC कक्ष!
सबसे रोचक और सराहनीय पहलू यह है कि इन VC कक्षों का निर्माण कार्य जेलों के अंदर प्रशिक्षित बंदियों से ही कराया जा रहा है। प्लास्टर, पुताई, वायरिंग, फर्नीचर बनाने जैसे काम कुशल कैदी कर रहे हैं। इससे विभाग को मजदूरी पर होने वाला लाखों रुपये का खर्च बच रहा है, साथ ही बंदियों को कौशल विकास का मौका मिल रहा है। जेल सुधार (Reformative Justice) की यह अनूठी मिसाल पूरे देश में चर्चा का विषय बन रही है।
खतरनाक अपराधियों के लिए वरदान
भोपाल सेंट्रल जेल में इस समय सिमी के 24, PFI के 20, हिजबुत तहरीर के 17, ISI से जुड़े 4, जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के 4 और 2 नक्सली बंदी हैं। इनकी पेशी मध्य प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसी दूरस्थ अदालतों में भी होती है। पहले इन्हें ले जाना युद्ध स्तर का ऑपरेशन होता था। अब VC के जरिए ये सभी पेशियाँ बिना किसी जोखिम के, मिनटों में पूरी हो रही हैं।
प्रदेश में जेलों का ताजा आँकड़ा
- केंद्रीय जेलें: 11 (पुरुष बंदी: 14,386 | महिला: 790)
- जिला जेलें: 41 (पुरुष: 9,351 | महिला: 758)
- खुली जेलें: 8 (केवल पुरुष: 138)
- सब-जेलें: 73 (पुरुष: 5,022 | महिला: 439)
आगे की योजना
जेल विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक हर जेल में कम से कम उतने VC यूनिट हों जितनी कि उस जेल से रोजाना औसतन पेशियाँ होती हैं। हर यूनिट पर एक आउटसोर्स कर्मचारी और एक जेल स्टाफ तैनात रहेगा, जो पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुचारू बनाए रखेगा।
यह परियोजना न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि पुलिस बल को अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था जैसे मूल कार्यों के लिए मुक्त करेगी। मध्य प्रदेश एक बार फिर देश के सामने डिजिटल जेल सुधार का मॉडल पेश कर रहा है।
