By: Ravindra Sikarwar
Bhopal news: राजधानी भोपाल के जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में एक मरीज को फफूंद लगी दर्द निवारक दवा देने का मामला सामने आया है। इस घटना ने अस्पताल की दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मरीज ने दवा में फफूंद देखी और उसे लेने से मना कर दिया। इसके बाद उसने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
घटना का विवरण
सतीश सेन नामक व्यक्ति को पैर में चोट लगी थी और वे इलाज के लिए जेपी अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में डॉक्टर ने पैर में फ्रैक्चर की संभावना जताते हुए एक्स-रे कराने को कहा और दर्द निवारक दवा लिखी। सतीश ने अस्पताल की फार्मेसी से दवा ली, लेकिन घर जाकर जब उसने दवा का पैक खोला, तो उसमें फफूंद पाई गई। इसके बाद, सतीश ने यह मामला सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के पास भेजा।
सतीश का आरोप
मरीज ने अपनी शिकायत में बताया कि शुक्रवार शाम 5 बजे वह हड्डी रोग विभाग में पहुंचे थे, लेकिन उस समय वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद नहीं थे। एक इंटर्न डॉक्टर ने उनकी देखरेख की और दवा लिखी। उन्होंने पर्ची के आधार पर दवा अस्पताल परिसर के मेडिकल स्टोर से खरीदी। घर लौटने पर दवा में फफूंद देखी गई, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह अंजाने में दवा ले लेते तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। उन्होंने इस घटना को सरकारी अस्पतालों पर नागरिकों के विश्वास को नुकसान पहुंचाने वाली घटना बताया।
दवा का विवरण
मरीज को दी गई दवा डिक्लोफेनाक 50 एमजी की टैबलेट थी। दवा पर एक्सपायरी तिथि जून 2027 अंकित थी। बैच नंबर: DSM 25002 था। यह दवा मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से 27 अक्टूबर 2025 को जेपी अस्पताल को उपलब्ध कराई गई थी।
सतीश की मांग
सतीश ने सीएमएचओ से मामले की तत्काल जांच की मांग की है और फार्मेसी में रखी दवाओं की गुणवत्ता का ऑडिट कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी मरीज को खराब या फफूंद लगी दवा न दी जाए और इस मामले में दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सीएमएचओ का बयान
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा, “जेपी अस्पताल से मरीज को फफूंद लगी दवा मिलने की शिकायत मिली है। इस मामले की जांच कराई जा रही है। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
निष्कर्ष
यह घटना सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता को उजागर करती है। ऐसे मामलों के कारण नागरिकों का भरोसा कमजोर हो सकता है, और इसलिए सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है।
