By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। नर्मदानगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सक्तापुर में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस आग की चपेट में आकर तीन घर पूरी तरह जलकर राख हो गए, जबकि एक किसान की जिंदा जलने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना मंगलवार सुबह करीब 7 बजे की बताई जा रही है। उस समय गांव के अधिकांश लोग रोजमर्रा के कामों में व्यस्त होने की तैयारी कर रहे थे या फिर खेतों की ओर निकल चुके थे। इसी दौरान अचानक गांव के एक हिस्से से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। कुछ ही पलों में आग ने पास के दो अन्य मकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिन दो घरों में पहले आग लगी थी, वहां रहने वाले परिवार समय रहते जाग गए और बाहर निकलने में सफल रहे। लेकिन तीसरे घर में रहने वाले 50 वर्षीय किसान सूरज राठौर उस वक्त अकेले सो रहे थे। आग लगने की जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिल सकी और जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, तब तक आग पूरे घर में फैल चुकी थी। आग की लपटों और घने धुएं के कारण सूरज राठौर बाहर नहीं निकल पाए और उनकी जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई।
ग्राम सरपंच सुनील राठौर ने बताया कि सुबह का समय होने के कारण कई लोग घरों से बाहर थे। सूरज राठौर घर में अकेले थे और आग इतनी तेज थी कि किसी को उन्हें बचाने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह हादसा पूरे गांव के लिए एक गहरा सदमा है।
आग की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। तहसीलदार, पुलिस बल और राजस्व विभाग के अधिकारी स्थिति को संभालने में जुट गए। आग बुझाने के लिए मूंदी, पुनासा, ओंकारेश्वर और संत सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट से कुल छह फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हालांकि, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उसे पूरी तरह काबू में करने में करीब तीन घंटे का समय लग गया।
ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआती समय में फायर ब्रिगेड की टीमों को पानी की व्यवस्था को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुछ गाड़ियों में पानी खींचने के लिए पर्याप्त पाइप नहीं थे। ऐसे में गांव के लोग जलाशय, पंचायत के टैंकर और अन्य संसाधनों से बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने में मदद करते रहे। ग्रामीणों और दमकल कर्मियों की संयुक्त कोशिशों के बाद कहीं जाकर आग पर काबू पाया जा सका।
भाजपा नेता और समाजसेवी दिग्विजयसिंह (संटू) तोमर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि गांव के अधिकांश घर पुराने और मिट्टी व लकड़ी से बने हुए हैं। ऐसे घरों में आग बहुत तेजी से फैलती है, जिससे नुकसान को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि फायर ब्रिगेड ने पूरी मेहनत की, लेकिन तब तक बहुत कुछ जलकर नष्ट हो चुका था।
इस अग्निकांड में तीन घर पूरी तरह से जलकर राख हो गए। घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर, बर्तन और रोजमर्रा की जरूरत का सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया। मृतक सूरज राठौर किसान थे और गांव में ही रहकर खेती-बाड़ी का काम करते थे। बताया गया है कि उनकी मां कुछ समय पहले अपनी बेटी के पास इंदौर चली गई थीं, जिससे वह घर में अकेले रह रहे थे।
यह गांव इंदिरा सागर बैकवाटर क्षेत्र के पास स्थित है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके।
घटना के बाद प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया है। साथ ही मृतक किसान के परिवार को नियमानुसार सहायता राशि देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन संसाधनों की जरूरत को उजागर कर दिया है।
