By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के झाबुआ शहर में नए साल की पूर्व संध्या पर एक अद्भुत आध्यात्मिक आयोजन हुआ, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से 1008 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया। मंगलवार की रात राजवाड़ा चौक पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया। ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के नारे आसपास के क्षेत्र में गूंजते रहे, जिससे पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह की लहर दौड़ गई। यह आयोजन श्री हनुमान चालीसा पाठ मंडली समिति द्वारा किया गया, जो शहरवासियों के लिए एक यादगार अनुष्ठान बन गया।


इस परंपरा की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब समिति ने हर मंगलवार को साप्ताहिक हनुमान चालीसा पाठ शुरू किया। शुरुआत में यह छोटे स्तर पर विभिन्न मंदिरों में होता था, लेकिन चार वर्षों की निरंतरता के बाद यह एक विशाल सामूहिक अनुष्ठान का रूप ले चुका है। इस बार का आयोजन विशेष रूप से भव्य था, क्योंकि नए साल की शुरुआत पर भक्तों ने संकल्प लिया कि बजरंगबली की कृपा से सभी कष्ट दूर हों और जीवन में सुख-शांति आए। हजारों की संख्या में जुटे श्रद्धालु परिवार सहित पहुंचे, जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल थे।
श्रद्धा की पर्चियां: मनोकामनाओं का विशेष समर्पण
आयोजन की सबसे अनोखी विशेषता रही ‘श्रद्धा की पर्ची’। भक्तों ने अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक परेशानियां, कष्ट, बाधाएं तथा मनोकामनाएं कागज पर लिखकर हनुमान जी महाराज के चरणों में अर्पित कीं। ये प्रार्थना पत्र बाद में गुजरात के प्रसिद्ध सालंगपुर कष्टभंजन देव हनुमान मंदिर भेजे जाएंगे। वहां स्वामी श्री हरिप्रकाश दास जी महाराज इन पर्चियों को हनुमान जी के चरणों में रखकर झाबुआ के भक्तों के दुख दूर करने और मनोकामनाएं पूरी करने की विशेष प्रार्थना करेंगे।

सालंगपुर मंदिर हनुमान जी के कष्टभंजन रूप के लिए विश्वभर में विख्यात है, जहां भक्तों को बुरी शक्तियों और संकटों से मुक्ति मिलती है। इस परंपरा से झाबुआ के श्रद्धालुओं में विशेष विश्वास जुड़ा हुआ है, क्योंकि कई भक्तों को पहले भी यहां से चमत्कारिक लाभ मिल चुका है।
संत का आशीर्वाद और समिति का योगदान
इस अवसर पर संत कमलजी महाराज की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक पवित्र बना दिया। उन्होंने भक्तों को मार्गदर्शन दिया और आशीर्वाद प्रदान किया, जिससे सभी के मन में शांति और ऊर्जा का संचार हुआ। आयोजन की सफलता में समिति के सदस्यों और सेवादारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नीरज राठौर, भावेश सोनी, शुभम राठौर, विश्वास शाह, नवनित त्रिवेदी, जीत ट्रेलर, हिमांशु घोटकर, दर्पण भाटी, आशीष पांडे, सतीश महेश्वरी, हरीश महेश्वरी तथा अभिषेक बरबेटा जैसे सेवादारों ने दिन-रात मेहनत की।
कार्यक्रम के अंत में समिति के अमरीश भावसार ने सभी भक्तों, सहयोगियों और उपस्थित जनों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक एकता और श्रद्धा को मजबूत करने वाला भी है।

हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भक्तों में नई ऊर्जा और विश्वास जगाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह चालीसा संकटमोचन हनुमान जी की महिमा का गुणगान करती है, जो भय, रोग और बाधाओं से मुक्ति दिलाती है। झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में ऐसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को जोड़ते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक माहौल बनता है। इस तरह के अनुष्ठान नए साल में लोगों को मजबूती और उम्मीद प्रदान करते हैं।
यह आयोजन झाबुआ की धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाले समय में और अधिक भव्य रूप लेगा। भक्तों की बढ़ती संख्या से साफ है कि बजरंगबली की भक्ति यहां गहरी जड़ें जमा चुकी है।
