By: Ravindra Sikarwar
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में धर्मांतरण का एक संगीन मामला सामने आया है। पुलिस ने गरीब व पिछड़े हिंदू परिवारों को नौकरी, इलाज और आर्थिक मदद का लालच देकर ईसाई बनाने के आरोप में डेविड नामक व्यक्ति सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा केंद्र जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी, सेक्टर-7 में एक मकान में चल रहा था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को गुप्त सूचना मिली थी कि इस मकान में दलित व अति-पिछड़े समाज के लोगों को बुलाकर उन्हें बाइबिल पढ़ाई जा रही है और प्रार्थना सभाओं के जरिए उनका ब्रेनवॉश किया जा रहा है।
रविवार दोपहर जैसे ही यह खबर संगठन के कार्यकर्ताओं तक पहुँची, बड़ी संख्या में विहिप, बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए। कार्यकर्ताओं ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया। एक महिला कार्यकर्ता अंदर घुसकर ऊपरी मंजिल तक गई और मोबाइल से वीडियो बनाने लगी। वहाँ मौजूद डेविड ने पहले उसे धमकाया, फिर समझौते के लिए पैसे और अन्य सुविधाओं का लालच दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं ने उसे और उसके साथियों को पकड़ लिया। बाहर सड़क पर नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ ही देर में पूरा इलाका गहमागहमी से भर गया। सूचना मिलते ही जगदीशपुरा पुलिस भी भारी बल के साथ पहुँच गई।
पुलिस ने मौके से डेविड और उसके छह सहयोगियों को हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान मकान से भारी मात्रा में धार्मिक साहित्य बरामद हुआ, जिसमें दर्जनों बाइबिल, ईसाई प्रार्थना-पुस्तिकाएँ, जीसस क्राइस्ट की तस्वीरें, प्रचार-पत्रक और कुछ कैश भी शामिल था। पुलिस ने कई मोबाइल फोन और लैपटॉप भी जब्त किए हैं, जिनमें कथित तौर पर उन गरीब परिवारों की लिस्ट और उनके आधार कार्ड की कॉपियां मिली हैं, जिन्हें टारगेट किया जा रहा था। विश्व हिंदू परिषद के ब्रज प्रांत उपाध्यक्ष सुनील पाराशर ने बताया कि मुख्य रूप से जाटव और वाल्मीकि समाज के मजबूर और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। उन्हें बीमारी ठीक करने, बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने और सरकारी योजनाओं में मदद दिलाने के नाम पर पहले विश्वास में लिया जाता था, फिर धीरे-धीरे प्रार्थना सभाओं में ले जाकर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार किया जाता था।
एसीपी लोहामंडी गौरव कुमार ने बताया कि सभी सात आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह केंद्र कितने समय से चल रहा था, इसके पीछे कौन-कौन लोग हैं और फंडिंग कहाँ से आ रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से इस मकान में संदिग्ध गतिविधियाँ चल रही थीं। रात में प्रार्थना सभाएँ होती थीं और बाहर से लोग आते-जाते रहते थे। कुछ लोगों ने तो यह भी आरोप लगाया कि जिन परिवारों ने धर्म बदलने से इनकार किया, उन्हें धमकियाँ भी दी गई थीं।
यह मामला एक बार फिर उत्तर प्रदेश में चल रहे अवैध धर्मांतरण के बड़े नेटवर्क को उजागर करता है। पिछले कुछ महीनों में लखनऊ, कानपुर, मेरठ और प्रयागराज में भी ऐसे कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही सख्त निर्देश दिए हैं कि धर्मांतरण के हर मामले में कड़ी कार्रवाई हो। इस घटना के बाद आगरा पुलिस अब पूरे शहर में ऐसे संदिग्ध केंद्रों की छानबीन तेज करने वाली है। फिलहाल सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम-2021 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। समाज के लोग इस कार्रवाई से संतुष्ट हैं, लेकिन उनकी मांग है कि ऐसे रैकेट चलाने वालों को आजीवन कारावास जैसी कठोर सजा मिलनी चाहिए, ताकि गरीब और अशिक्षित लोगों का शोषण बंद हो।
