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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक बड़ा भू-माफिया गिरोह पकड़ा गया है, जिसने जाली आधार कार्ड और मृत किसानों की पहचान का इस्तेमाल करके 150 बीघा से अधिक जमीन बेच दी। यह एक बड़े और सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला है।

भू-माफिया का जाल और काम करने का ढंग:
ग्वालियर पुलिस ने इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह में कई प्रॉपर्टी डीलर, बिचौलिए और कुछ सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इनकी कार्यप्रणाली (modus operandi) बेहद चालाकी भरी थी। वे ऐसे किसानों की जमीनों को निशाना बनाते थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी और जिनके कोई सीधे वारिस नहीं थे।

  • जाली आधार कार्ड: गिरोह के सदस्य मृत किसानों के नाम पर जाली आधार कार्ड बनवाते थे।
  • नकली पहचान: वे मृत किसानों के हमशक्ल लोगों को खोजते थे और उन्हें मृत किसान बनाकर पेश करते थे।
  • फर्जी दस्तावेज: फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का उपयोग करके, वे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में भूमि का पंजीकरण करवाते थे और उसे बेच देते थे।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी:
पुलिस को इस धोखाधड़ी की सूचना तब मिली जब एक किसान के वारिसों ने अपनी पैतृक जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर पाया। गहन जांच के बाद, पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना, एक प्रॉपर्टी डीलर, और उसके कुछ सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उनके पास से बड़ी संख्या में जाली दस्तावेज, मुहरें और फर्जी आधार कार्ड बनाने के उपकरण भी बरामद किए हैं।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस गिरोह ने अब तक 150 बीघा से अधिक जमीन की बिक्री की है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये है। इस मामले में कई अन्य लोगों की संलिप्तता का भी संदेह है, और जांच अभी जारी है।

आम जनता के लिए चेतावनी:
यह घटना आम लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अधिकारियों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपनी संपत्ति के दस्तावेजों की नियमित रूप से जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें। इस मामले में धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को जल्द ही न्याय दिलाने का वादा किया गया है।

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